अक्सर लोग क्रेडिट स्कोर को तब तक गंभीरता से नहीं लेते, जब तक कि उन्हें किसी बड़े लोन या क्रेडिट कार्ड की सख्त जरूरत न महसूस हो। इसे आमतौर पर एक ऐसी संख्या मान लिया जाता है जिसकी जरूरत केवल बैंक की दहलीज पर पड़ती है। लेकिन आर्थिक जानकारों का मानना है कि यह सोच भविष्य के लिए जोखिम भरी हो सकती है।
क्रेडिट स्कोर आपकी विश्वसनीयता का वह पैमाना है, जिसे आप रातों-रात तैयार नहीं कर सकते। फिनटेक प्लेटफॉर्म ‘जेट’ (ZET) के CEO और को-फाउंडर मनीष शारा के मुताबिक, क्रेडिट स्कोर महज एक नंबर नहीं है, बल्कि यह आपके पैसे संभालने की आदत का एक ‘व्यवस्थित रिकॉर्ड’ है। यह तय करता है कि भविष्य में आपके पास पैसे को लेकर क्या विकल्प होंगे।
आमतौर पर देखा जाता है कि लोग क्रेडिट स्कोर पर तभी ध्यान देते हैं जब कोई अर्जेन्ट लोन चाहिए होता है। मनीष कहते हैं, “यहीं से समस्या की शुरुआत होती है। क्रेडिट स्कोर कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे बैंक आखिरी मिनट पर सिर्फ चेक करते हैं, बल्कि यह इस बात का रिकॉर्ड है कि आप अपने पैसों को मैनेज कैसे करते हैं।”
मनीष आगे कहते हैं, “इसकी असली अहमियत तब समझ में आती है, जब अचानक कोई बड़ा आर्थिक संकट सामने आ जाता है। चाहे मेडिकल इमरजेंसी हो, बिजनेस में अचानक नुकसान हो या घर का कोई जरूरी खर्च, ऐसे समय में तुरंत पैसों की जरूरत पड़ती है।”
शारा बताते हैं कि जिन लोगों का क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होता है, उन्हें बैंक से जल्दी लोन अप्रूवल मिल जाता है और ज्यादा कागजी कार्रवाई भी नहीं करनी पड़ती। वहीं, जिनका क्रेडिट हिस्ट्री कमजोर होती है या बिल्कुल नहीं होती, उन्हें ऐसे मुश्किल वक्त में देरी और सख्त जांच का सामना करना पड़ता है, जब हर मिनट कीमती होता है।
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क्रेडिट स्कोर सिर्फ लोन मिलने की संभावना नहीं बढ़ाता, बल्कि यह भी तय करता है कि आपको लोन कितनी महंगी या सस्ती दर पर मिलेगा। बैंक और दूसरे लेंडर्स इसी स्कोर से यह समझते हैं कि आपको पैसा देना उनके लिए कितना सुरक्षित या जोखिम भरा है। मनीष कहते हैं, “मजबूत क्रेडिट स्कोर वाले लोगों को आमतौर पर बेहतर शर्तों और कम ब्याज दर पर लोन मिलता है। ब्याज दर में थोड़ी सी कमी भी लोन की चुकाई जाने वाली कुल रकम को काफी कम कर सकती है।”
यानी अगर आप आज अपना क्रेडिट स्कोर अच्छा बनाए रखते हैं, तो भविष्य में लिया गया लोन आपको काफी सस्ता पड़ सकता है। अब क्रेडिट स्कोर की अहमियत सिर्फ बैंक से लोन लेने तक सीमित नहीं रही। कई संस्थान इसे इस बात का संकेत मानते हैं कि कोई व्यक्ति पैसों को संभालने और समय पर भुगतान करने के मामले में कितना भरोसेमंद है। यह आपकी ऐसी पहचान बन चुका है, जिसे लगभग हर उस जगह देखा जाता है जहां उधार, क्रेडिट या किसी तरह की आर्थिक जिम्मेदारी की बात होती है।
सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों के सामने आती है जिन्होंने कभी कोई लोन या कर्ज नहीं लिया होता। कई लोगों को लगता है कि कर्ज से दूर रहना अच्छी बात है, लेकिन मनीष का कहना है कि बिना किसी क्रेडिट हिस्ट्री के जरूरत पड़ने पर बैंक से मदद लेना मुश्किल हो सकता है।
मनीष बताते हैं, “क्रेडिट स्कोर एक दिन में नहीं बनता, बल्कि समय के साथ धीरे-धीरे तैयार होता है। यह आपकी रोजमर्रा की आदतों, जैसे समय पर बिल भरना और जिम्मेदारी से क्रेडिट इस्तेमाल करने से बेहतर होता है।”
जो लोग पहली बार अपना क्रेडिट प्रोफाइल बनाना शुरू कर रहे हैं, उनके लिए मनीष ने ‘सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड’ को अच्छा विकल्प बताया है। ये कार्ड फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बदले दिए जाते हैं, इसलिए इन्हें लेने के लिए इनकम प्रूफ या पुराने क्रेडिट स्कोर की जरूरत नहीं पड़ती।
मनीष के मुताबिक, अगर इन कार्ड्स का जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाए और भुगतान समय पर किया जाए, तो धीरे-धीरे अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाना या पुराने स्कोर को सुधारना शुरू किया जा सकता है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया भले धीमी हो, लेकिन लगातार सही तरीके से चलती रहती है और भविष्य में जरूरत पड़ने पर आपके लिए फाइनेंशियल मदद के रास्ते खुले रखती है।