जब बात पर्सनल फाइनेंस की होती है, तो इसके दो सबसे अहम हिस्से होते हैं, इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट। मन की शांति और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए दोनों ही चीजें बेहद जरूरी हैं। हालांकि, जीवन में इंश्योरेंस, खासकर हेल्थ इंश्योरेंस, हमेशा सबसे पहले होना चाहिए। इसके बाद ही इन्वेस्टमेंट की तरफ बढ़ना बेहतर माना जाता है। इस गाइड में हम विस्तार से समझेंगे कि अपने पैसों और भविष्य की सुरक्षा को सबसे पहले रखना क्यों जरूरी है।
हेल्थ इंश्योरेंस असल में एक व्यक्ति और इंश्योरेंस कंपनी के बीच होने वाला एक समझौता होता है। इस समझौते के तहत व्यक्ति तय समय पर प्रीमियम यानी एक निश्चित रकम चुकाता है। इसके बदले में कंपनी बीमारी या दूसरी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के इलाज पर आने वाले मेडिकल खर्चों में आर्थिक मदद देती है। बाजार में कई तरह के हेल्थ इंश्योरेंस प्लान मौजूद हैं, जो अलग-अलग बीमारियों और सुविधाओं को कवर करते हैं। इन प्लान्स का प्रीमियम भी अलग-अलग होता है। कोई भी व्यक्ति अपनी जरूरत और प्रीमियम भरने की क्षमता के मुताबिक अपने लिए सही प्लान चुन सकता है।
कम उम्र में ही हेल्थ इंश्योरेंस लेना आपके पैसों और भविष्य की सुरक्षा के लिए बहुत अहम माना जाता है। आज के समय में नई-नई बीमारियां सामने आ रही हैं और उनके लिए बेहतर इलाज व दवाइयां भी उपलब्ध हैं, लेकिन इसके साथ इलाज का खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाए, तो हेल्थ इंश्योरेंस इन बड़े मेडिकल खर्चों का बोझ कम करने में मदद करता है।
यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के समय इलाज का खर्च आपकी जेब पर भारी न पड़े और आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे।
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हेल्थ इंश्योरेंस को भी आपके दूसरे इन्वेस्टमेंट्स जितना ही जरूरी और अहम माना जाना चाहिए। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:
किसी भी व्यक्ति को हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदने से पहले उससे जुड़े सभी नियम और शर्तों के साथ-साथ ऑफर डॉक्यूमेंट्स को ध्यान से पढ़ना चाहिए। सही प्लान का चुनाव हमेशा अपनी प्रीमियम चुकाने की क्षमता और परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखकर करना चाहिए। आप जिस प्लान को चुनते हैं, उसी के मुताबिक दवाइयों, अस्पताल में भर्ती होने के खर्च, मेडिकल जांच, कमरे के किराए और अलग-अलग मेडिकल प्रक्रियाओं का खर्च कवर किया जाता है। एक बार आपका इंश्योरेंस प्लान शुरू हो जाने के बाद, किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में इलाज का खर्च इंश्योरेंस कंपनी उठाती है।
हेल्थ इंश्योरेंस में क्लेम करने के मुख्य रूप से दो तरीके होते हैं, कैशलेस और रीइंबर्समेंट।
जब आप अपने लिए एक अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस प्लान ले लेते हैं, तो उसके बाद अगला कदम इन्वेस्टमेंट की तरफ बढ़ने का होता है। हालांकि, इन्वेस्टमेंट शुरू करने से पहले अपने लिए एक इमरजेंसी फंड यानी आपातकालीन कोष तैयार करना बेहद जरूरी है। इसे रिजर्व फंड भी कहा जाता है। यह फंड मेडिकल इमरजेंसी के दौरान आपके हेल्थ इंश्योरेंस का सहारा बनता है, ताकि अस्पताल के खर्चों के अलावा होने वाले दूसरे छोटे-मोटे खर्चों के लिए आपको किसी से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेने की जरूरत न पड़े।
जब आपका हेल्थ इंश्योरेंस और इमरजेंसी फंड दोनों तैयार हो जाएं, तब आपको अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए इन्वेस्टमेंट की शुरुआत करनी चाहिए। यह इन्वेस्टमेंट आगे चलकर जीवन के बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करता है, जैसे बच्चों की शिक्षा, अपना घर या प्रॉपर्टी खरीदना, विदेश यात्रा करना और रिटायरमेंट की तैयारी करना।
इन्वेस्टमेंट के मामले में हमेशा जितनी जल्दी हो सके शुरुआत करनी चाहिए और लंबी अवधि को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। जो लोग इस क्षेत्र में नए हैं, उनके लिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP से शुरुआत करना एक अच्छा विकल्प माना जाता है। SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में हर महीने या तय अंतराल पर थोड़ी-थोड़ी रकम लगाई जाती है। जिस दिन आप पैसा लगाते हैं, उस दिन के नेट एसेट वैल्यू (NAV) के आधार पर आपको म्यूचुअल फंड की यूनिट्स बांट दी जाती हैं।
आखिर में, आपके और आपके परिवार के पैसों और भविष्य की सुरक्षा के लिए हेल्थ इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट दोनों ही बेहद जरूरी हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इनकी प्राथमिकता सही होनी चाहिए। इसलिए सबसे पहले हेल्थ इंश्योरेंस से शुरुआत करें और उसके बाद इन्वेस्टमेंट की तरफ बढ़ें। आखिर पुरानी कहावत भी है, “जान है तो जहान है” (Health is Wealth)।
क्या कोई व्यक्ति हेल्थ इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट दोनों एक साथ शुरू कर सकता है?
हां, बिल्कुल। हेल्थ इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट दोनों का साथ होना जरूरी है, ताकि आपकी जमा-पूंजी अचानक खत्म न हो और मेडिकल खर्चों के साथ-साथ भविष्य के बड़े लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भी पैसों की व्यवस्था बनी रहे।
क्या इमरजेंसी फंड हेल्थ इंश्योरेंस की जगह ले सकता है?
नहीं, बिल्कुल नहीं। इमरजेंसी फंड कभी भी हेल्थ इंश्योरेंस का विकल्प नहीं बन सकता। यह सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस का सहारा बनता है और उसकी सीमाओं को पूरा करने में मदद करता है। किसी भी बड़े आर्थिक झटके से बचने के लिए इन दोनों का होना बेहद जरूरी है।
हेल्थ इंश्योरेंस कब खरीदना चाहिए?
हर व्यक्ति को कम उम्र में ही हेल्थ इंश्योरेंस ले लेना चाहिए, ताकि उसे ज्यादा से ज्यादा मेडिकल कवरेज मिल सके और स्वास्थ्य से जुड़ी शर्तों या पाबंदियों का असर कम रहे।