facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Womens Day 2026: देश की महिलाओं में बढ़ा हेल्थ कवर लेने का क्रेज, लेकिन अभी भी बड़ा ‘गैप’ बाकी!

Advertisement

पारंपरिक तौर पर भारतीय घरों में महिलाएं पूरे परिवार की सेहत का ख्याल रखती आई हैं, लेकिन जब बात खुद की सुरक्षा की आती है, तो वे इसे अक्सर टाल देती हैं

Last Updated- March 06, 2026 | 7:39 PM IST
Health Insurance
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी लगभग दोगुनी होकर 40% के पार पहुंच गई है। पिछले सात सालों में करीब 1.56 करोड़ महिलाएं फॉर्मल जॉब्स यानी औपचारिक नौकरियों से जुड़ी हैं। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के बावजूद, अपनी सेहत को लेकर भारतीय महिलाएं अब भी काफी पीछे हैं। हेल्थ इंश्योरेंस के मामले में एक बड़ा ‘गैप’ देखने को मिल रहा है, जिसे भरने की जरूरत है।

महिला दिवस 2026 को लेकर केयर हेल्थ इंश्योरेंस द्वारा शेयर किए गए आंकड़े बताते हैं कि उनकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों (Individual Health Insurance Policy) में महिला प्रपोजर्स (पॉलिसी खरीदने वाली) की हिस्सेदारी 28-30% है। राहत की बात यह है कि पिछले कुछ सालों में इस आंकड़े में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन इसमें और बढ़ोतरी जरूरी है। भारतीय महिलाएं अभी 10 से 15 लाख रुपये तक का बीमा कवर चुन रही हैं, जो बढ़ती मेडिकल महंगाई को देखते हुए एक सही कदम माना जा सकता है।

बदल रही है सोच: महिलाएं अब खुद के लिए भी सजग

पारंपरिक तौर पर भारतीय घरों में महिलाएं पूरे परिवार की सेहत का ख्याल रखती आई हैं, लेकिन जब बात खुद की सुरक्षा की आती है, तो वे इसे अक्सर टाल देती हैं। केयर हेल्थ इंश्योरेंस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) मनीष डोडिया कहते हैं कि महिलाएं हमेशा से परिवार की ‘हेल्थ एंकर’ रही हैं, जो अपनी जरूरतों से ऊपर दूसरों की सेहत को रखती हैं। हालांकि, अब यह सोच बदल रही है। आज महिलाएं न केवल घर के आर्थिक फैसले ले रही हैं, बल्कि खुद के लिए प्राइमरी पॉलिसीहोल्डर भी बन रही हैं।

Also Read: IRDAI 1 अप्रैल से इंश्योरेंस कंपनियों के लिए नया नियम करेगा लागू: पॉलिसीधारकों के लिए क्या बदलेगा?

मनीष कहते हैं कि आज की महिलाएं केवल बेसिक बीमा ही नहीं ले रही हैं, बल्कि वे अपनी खास जरूरतों के हिसाब से ‘राइडर्स’ (अतिरिक्त कवर) भी चुन रही हैं। इनमें मेटरनिटी बेनिफिट्स के साथ-साथ अब IVF और सरोगेसी जैसे आधुनिक उपचारों को भी शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा, ओपीडी (OPD) खर्च, डायग्नोस्टिक टेस्ट और वेटिंग पीरियड को कम करने वाले ‘इंस्टेंट कवर’ की मांग भी बढ़ी है। महिलाएं अब वेलनेस और प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप पर भी ध्यान दे रही हैं, जो यह दिखाता है कि वे अपनी सेहत को लेकर अब ज्यादा जागरूक और प्रोएक्टिव हो गई हैं।

बढ़ती बीमारियां और बीमा की जरूरत

पब्लिक हेल्थ के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) का खतरा तेजी से बढ़ा है। साथ ही एनीमिया यानी खून की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में बिना किसी ठोस हेल्थ कवर के इलाज का भारी-भरकम खर्च किसी भी परिवार की आर्थिक स्थिति बिगाड़ सकता है।

बीमा नियामक IRDAI की रिपोर्ट के अनुसार, लाइफ इंश्योरेंस में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 34% है। लेकिन इंश्योरेंस बेचने वाले सेक्टर यानी डिस्ट्रीब्यूशन में महिलाओं की मौजूदगी अभी भी 29 से 32% के आसपास ही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक महिलाएं बीमा क्षेत्र के हर स्तर पर अपनी भागीदारी नहीं बढ़ाएंगी और पर्याप्त कवर नहीं लेंगी, तब तक उनकी आर्थिक सुरक्षा का चक्र पूरा नहीं होगा।

Advertisement
First Published - March 6, 2026 | 7:39 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement