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Editorial: जर्मन चांसलर मैर्त्स की भारत यात्रा से भारत-ईयू एफटीए को मिली नई रफ्तार

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मैर्त्स ने कहा कि एफटीए को उनके देश का तगड़ा समर्थन है। उन्होंने इसके शीघ्र होने की बात भी कही। जानकारी के मुताबिक भारत और यूरोपीय संघ के एफटीए पर 27 जनवरी को हस्ताक्षर होंगे

Last Updated- January 13, 2026 | 10:00 PM IST
India Germany partnership
जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी | फोटो: PTI

जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की दो दिवसीय भारत यात्रा ने यूरोपीय संघ के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के संपन्न होने को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं। मैर्त्स ने कहा कि एफटीए को उनके देश का तगड़ा समर्थन है। उन्होंने इसके शीघ्र होने की बात भी कही। जानकारी के मुताबिक भारत और यूरोपीय संघ के एफटीए पर 27 जनवरी को हस्ताक्षर होंगे।

यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। एफटीए के लिए तगड़ा समर्थन जताने के अलावा सोमवार को मैर्त्स की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात और बातचीत ने भी दोनों देशों के रिश्तों में मजबूती लाने का काम किया है। दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में साझेदारी का वादा किया है।

बीतते वर्षों के साथ दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच 50 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाले व्यापार का 25 फीसदी भारत और जर्मनी के बीच होता है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आपसी व्यापार को और बढ़ाएगा। बहरहाल दोनों देशों का रिश्ता कहीं अधिक गहरा है।

उदाहरण के लिए गत वर्ष भारत और जर्मनी की रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो गए। रक्षा के क्षेत्र में जर्मनी नौसैनिक अभ्यास मिलन में तथा सितंबर में लड़ाकू विमानों के हवाई अभ्यास में हिस्सा लेना चाहता है। दोनों देश एक रक्षा औद्योगिक सहयोग खाका तैयार करना चाहते हैं ताकि विभिन्न उद्योगों के क्षेत्र में दीर्घकालिक रिश्ता कायम किया जा सके। इसमें तकनीकी साझेदारी की बात भी शामिल है। विचार यह है कि रक्षा प्लेटफॉर्म और उपकरणों का संयुक्त रूप से विकास किया जाए। इसके अतिरिक्त, दोनों देश प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग करेंगे, जिसमें सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला भी शामिल है। दोनों देश हरित और सतत विकास लक्ष्यों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं।

इसके अलावा मोदी ने नई शिक्षा नीति के तहत जर्मनी के प्रमुख विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर खोलने के लिए भी आमंत्रित किया है। दोनों देश आम जनता के बीच संपर्क मजबूत करना चाहते हैं। इस संदर्भ में मैर्त्स ने जर्मनी के रास्ते गुजरने वाले भारतीयों के लिए वीजा मुक्त ट्रांजिट सुविधा की घोषणा की है। दोनों देशों के बीच रिश्ते या व्यापक रूप से कहें तो भारत और यूरोपीय संघ के बीच रिश्ते, तेजी से बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो गए हैं।

ऐसी साझेदारियां किसी न किसी रूप में नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक होंगी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। अब अधिकांश देशों के लिए यह स्पष्ट हो गया है कि व्यापार या रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी के लिए अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का मानना है कि अमेरिका के सहयोगी उसके प्रति न्यायसंगत नहीं रहे हैं। यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ एकतरफा व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, और उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य रक्षा व्यय बढ़ा रहे हैं।

अमेरिका का व्यवहार भारत के साथ भी अनुचित रहा है। 25 फीसदी के कथित जवाबी शुल्क के अलावा उसने भारत पर रूसी तेल आयात करने के कारण 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगा दिया। महीनों की बातचीत के बाद भी दोनों के बीच व्यापार समझौता नहीं हो सका है। भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने इस सप्ताह पद भार संभालने के बाद सही संकेत दिए हैं। हालांकि यह देखना होगा कि भारत और अमेरिका कितनी जल्दी समझौते पर पहुंचते हैं।

ऐसे में दिए गए संदर्भ में भारत और यूरोपीय संघ दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण है कि वे जल्द से जल्द मुक्त व्यापार समझौते को अंजाम दें। इससे उनकी साझेदारी मजबूत होगी और रिश्तों में स्थायित्व आएगा। इसके लिए दोनों पक्षों को लचीला रुख अपनाना पड़ सकता है। खासकर यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र जैसे मसलों को लेकर ऐसा करना पड़ सकता है।

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First Published - January 13, 2026 | 9:56 PM IST

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