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सेमीकंडक्टर का नया ठिकाना बना ‘साणंद’, माइक्रॉन की ‘लाइट स्पीड’ प्रगति ने दुनिया को चौंकाया

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टाटा नैनो से शुरू हुआ साणंद का सफर अब माइक्रॉन के सेमीकंडक्टर प्लांट तक पहुँच गया है, जो भारत को वैश्विक चिप मानचित्र पर नई पहचान दे रहा है

Last Updated- March 15, 2026 | 10:00 PM IST
semiconductor chips
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अमेरिका की सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रॉन ने कुछ दिन पहले गुजरात के साणंद में अपना चिप असेंबली, टेस्टिंग, मॉनिटरिंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) संयंत्र शुरू किया। कंपनी ने भारत में अपने संयंत्र के लिए जगह का चयन करते समय काम की रफ्तार को ध्यान में रखा था। आईडहो मुख्यालय वाली इस कंपनी के दुनिया भर में संयंत्र हैं और भारत में उसे दो जगहों का विकल्प मिल रहा था जिनमें गुजरात में मौजूद धोलेरा और साणंद शामिल हैं। दोनों ही शहर, राज्य में विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

एक समय ऐसा था जब लग रहा था कि माइक्रॉन धोलेरा का चयन कर सकती है जिसे सेमीकंडक्टर शहर के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा था। फिर भी डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमरी (डीरैम) और एनएएनडी (भंडारण तकनीक) वेफर्स के लिए मशहूर कंपनी ने 2023 की अपनी घोषणा में साणंद जीआईडीसी (गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) को अपनी पसंदीदा जगह के रूप में चुना। 

हाल में माइक्रॉन संयंत्र के उद्घाटन ने भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर ला खड़ा किया। स्थानीय लोग इसे एक नई औद्योगिक क्रांति के रूप में देख रहे हैं। यह वास्तव में साणंद के विकास की यात्रा को वर्ष 2008 के टाटा नैनो संयंत्र से लेकर अब माइक्रॉन संयंत्र तक जोड़ती है, जिसे अब इसका अहम केंद्र माना जा रहा है। इस क्षेत्र के प्रमुख उद्योगपतियों का कहना है कि यह साणंद 1.0 से साणंद 2.0 में बदलाव का संकेत है जिसमें अब यहां पूरा जोर सेमीकंडक्टर पर है।  

माइक्रॉन के अलावा, सीजी सेमी और केंस टेक्नॉलजी ने भी साणंद में आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली ऐंड टेस्ट (ओएसएटी) संयंत्र स्थापित किए हैं जो अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से लगभग 50 मिनट ड्राइव की दूरी पर है। इस विशाल परिसर में कई अन्य सेमीकंडक्टर परियोजनाएं भी आ रही हैं, जो 2,200 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां 54 बहुराष्ट्रीय कंपनियां और 600 सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योग (एमएसएमई) भी मौजूद हैं। जब हम मुख्यतौर पर वाहन का केंद्र रहे साणंद में सेमीकंडक्टर की यात्रा की शुरुआत को देखते हैं तब यह स्पष्ट होता है कि यहां के बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स ने वह रफ्तार दी, जिसकी इस उद्योग को वास्तव में जरूरत थी। 

जब मैं मई 2024 में धोलेरा में यह रिपोर्ट करने गई कि सेमीकंडक्टर का केंद्र बन रहे इस शहर में कैसी हलचल है तब वहां के अधिकारियों ने माइक्रॉन के साणंद के चयन को एक बड़ा झटका बताया। उनका कहना था कि कंपनी को भारत में अपना काम शुरू की जल्दबाजी थी। साणंद में इसके लिए पारिस्थितिकी तंत्र और बुनियादी ढांचा पहले से मौजूद था और माइक्रॉन तुरंत अपना काम शुरू कर सकती थी। वहीं इसके उलट, धोलेरा अब भी अपने विकास की प्रक्रिया में था।

गुजरात में साणंद के विनिर्माण केंद्र का जायजा लेने के लिए की गई यात्रा के दौरान माइक्रॉन के संयंत्र में भी जाना हुआ क्योंकि उस वक्त अमेरिका की यह कंपनी आकर्षण का केंद्र थी। उन दिनों कंपनी ने वहां अपनी शुरुआत की ही थी। जब मैंने वहां का दौरा किया तब धोलेरा और साणंद जैसे विनिर्माण केंद्र के नियमित अधिकारियों ने यह चेतावनी दी थी कि माइक्रॉन संयंत्र पर अधिक समय न बिताएं और न ही इसे बहुत करीब से इसे देखने जाएं क्योंकि कंपनी अपने कारोबार के हर पहलू की गोपनीयता को लेकर बहुत सतर्कता बरत रही थी। यह सब समय बिल्कुल न गंवाने से भी जुड़ा मामला था। निर्माण स्थल पर काम करने वाले श्रमिक और ठेकेदार पूरी तरह से इसका पालन करते हुए दिखे।

लगभग दो साल बाद जब संयंत्र का उद्घाटन हुआ तब माइक्रॉन की साइट पर मेरी यात्रा के दौरान बरती गई गोपनीयता की बात स्पष्ट हो गई। यह सब कुछ रफ्तार से जुड़ा मामला था। उद्घाटन के बाद एक सम्मेलन में माइक्रॉन टेक्नॉलजी के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्या​धिकारी संजय मेहरोत्रा ने कहा, ‘सेमीकंडक्टर में, आपूर्ति श्रृंखला वास्तव में प्रकाश की गति से चलनी चाहिए।’ मेहरोत्रा ने कहा कि निकटता का बहुत महत्त्व होता है, साथ ही स्थानीय उपस्थिति, स्थानीय सहायता और सेवाएं भी उतनी ही जरूरी हैं। 

दरअसल, कंपनियों के लिए तेजी से काम करना तभी संभव है जब पूरा औद्योगिक तंत्र उनका साथ दे। अहमदाबाद से महज 22 किलोमीटर दूर मौजूद साणंद भी इसी तरह का सहयोग दे रहा है। गांधीनगर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले, जिसका प्रतिनिधित्व कई वर्षों तक अमित शाह और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं ने किया है, इस शहर में अब पहला पांच सितारा होटल खुल रहा है और जल्द ही एक अन्य होटल का निर्माण भी शुरू हो सकता है।

साणंद को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने उच्च स्तरीय बैठक स्थलों और गोल्फ जोन के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया है। अवकाश और मनोरंजन के लिए भी शहर और उसके आसपास कई पिकनिक स्थल बने हैं जहां दिन भर के लिए जाया जा सकता है। इसके अलावा बॉक्स क्रिकेट और पिकल बॉल के लिए भी स्थान है जो साणंद की ओर जाते हुए सड़क यात्रा के दौरान आसानी से दिखाई देते हैं। साणंद की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बड़े शहरों और अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के बेहद करीब है जिसके कारण यह उद्योगों के लिए अधिक आकर्षक है।

हाल के दिनों में यह शहर एक अलग वजह से भी सुर्खियों में रहा। राज्य में लागू शराबबंदी नीति के बावजूद एक पार्टी में शराब पीने के आरोप में कुछ लोगों की गिरफ्तारी की खबरों ने सुर्खियां बनाई। हालांकि इसके अलावा भी साणंद के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में अब भी कुछ कमियां मौजूद हैं, जिनमें कुशल श्रमिकों की कमी सबसे बड़ी चिंता है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार और उद्योग जगत मिलकर काम कर रहे हैं। स्थानीय परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था का अभाव भी निवेशकों और स्थानीय समुदाय के लिए एक चुनौती बना हुआ है।

इन चुनौतियों के बावजूद साणंद का बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स वास्तव में उद्योगों और निवेशकों को धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (एसआईआर) की तुलना में बेहतर बढ़त देते हैं जो अहमदाबाद से लगभग 100 किलोमीटर दूर है। उम्मीद की जा रही है कि धोलेरा में स्थापित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की सेमीकंडक्टर इकाई ,वहां के विनिर्माण केंद्र को उसी तरह रफ्तार देगी, जैसे कई वर्ष पहले टाटा नैनो संयंत्र ने साणंद को औद्योगिक पहचान दी थी और आज माइक्रॉन इस जगह को यह पहचान दे रही है।

उम्मीद यह भी है कि धोलेरा में बनने वाला हवाईअड्डा, जिसका काम संभवतः इसी वर्ष शुरू हो सकता है, वह इस क्षेत्र के विकास में बड़ा अंतर लाएगा और इसकी रफ्तार कम नहीं होगी। वर्ष 2030 में राज्य में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से पहले यहां के बुनियादी ढांचे के निर्माण का महत्त्व और भी बढ़ जाएगा।

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First Published - March 15, 2026 | 10:00 PM IST

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