तमिलनाडु 375 अरब डॉलर (लगभग 31 लाख करोड़ रुपये) के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और राष्ट्रीय औसत से 1.6 गुना अधिक प्रति व्यक्ति आय के साथ, भारत का एक प्रमुख आर्थिक केंद्र है। यह 1991 की तुलना में एक महत्त्वपूर्ण सुधार है, जब इसकी प्रति व्यक्ति आय अखिल भारतीय औसत से 0.85 गुना थी।
यह बदलाव तमिलनाडु में 1991 के सुधारों के बाद हुई तीव्र आर्थिक वृद्धि का परिणाम है, जिसके तहत 1994 से 2023 तक प्रति व्यक्ति जीडीपी में सालाना 5.8फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि इस दौरान पूरे भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 4.7 फीसदी बढ़ी। राज्य ने अब 2030 तक 1 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसका अर्थ होगा प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 13,000 डॉलर तक पहुंच जाना।
तेजी से विकास करने वाले राज्यों में आमतौर पर विकास को बढ़ावा देने वाले गुण मजबूत होते हैं जिनमें सामाजिक और भौतिक पूंजी, और शासन की गुणवत्ता शामिल हैं। तमिलनाडु इसका अपवाद नहीं है। उच्च शिक्षा में इसका सकल नामांकन अनुपात सबसे अधिक 50 फीसदी है, जो प्रमुख राज्यों के औसत 28 फीसदी की तुलना में सबसे अधिक है। तमिलनाडु में कक्षा 8 तक कोई भी छात्र स्कूल नहीं छोड़ता है, और माध्यमिक शिक्षा में, स्कूल छोड़ने की दर राष्ट्रीय औसत से आधी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार, तमिलनाडु में बच्चों के बौनेपन की दर राष्ट्रीय औसत फीसदी प्रतिशत की तुलना में 25 फीसदी है, जो कि सबसे कम दरों में से एक है। इसके लगभग करीब 100 फीसदी गांव बारहमासी सड़कों से जुड़े हुए हैं।
तमिलनाडु ने बजट घाटा जीडीपी का 3 फीसदी बनाए रखते हुए इन मजबूत आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किया है और देश में हिंसात्मक अपराध दर भी वहां सबसे कम है। हालांकि, कुछ कमजोरियां भी मौजूद हैं, जैसे कि सड़कों की उपलब्धता राष्ट्रीय औसत से 30फीसदी कम है। राज्य में अभी भी आठ घंटे से अधिक काम करने की अनुमति नहीं है और गैर-कृषि कार्यों के लिए न्यूनतम मजदूरी लगभग 480 रुपये प्रति दिन है, जो गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र में 300-350 रुपये की तुलना में अधिक है।
राज्य की बुनियादी मजबूती राज्य के प्रमुख आर्थिक केंद्रों (केईसी) में भी दिखाई देती हैं जिससे राज्य की समग्र वृद्धि में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। तमिलनाडु में ऐसे चार केईसी चेन्नई शहरी समूह, कोयंबत्तूर, मदुरै और तिरुचिरापल्ली हैं, जिनका सामूहिक रूप से राज्य के जीडीपी में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है और 2002-23 के दौरान इन्होंने राज्य के शेष हिस्सों की तुलना में लगभग 3 फीसदी अधिक, यानी 9 फीसदी प्रति वर्ष की दर से वृद्धि दर्ज की। हालांकि, तमिलनाडु के केईसी के इस औसत बेहतर प्रदर्शन से यह तथ्य छिप जाता है कि वास्तव में चेन्नई शहरी समूह (यूए) ही इस प्रदर्शन को गति प्रदान करता है।
चेन्नई शहरी क्षेत्र तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था का एक तिहाई हिस्सा है और 2002 से 2023 के बीच इसमें सालाना 10 फीसदी की वृद्धि हुई। इस शहरी क्षेत्र की शानदार वृद्धि का नेतृत्व कांचीपुरम जिले ने किया (चेन्नई शहरी क्षेत्र में कांचीपुरम सहित तीन जिले शामिल हैं), जिसमें सालाना 12 फीसदी की वृद्धि हुई। विनिर्माण और व्यावसायिक सेवा, दोनों ने इस तीव्र वृद्धि में योगदान दिया जिनकी वृद्धि 2002-2023 में संबंधित राज्य-क्षेत्रों की वृद्धि दर की तुलना में क्रमशः 60 फीसदी और 80 फीसदी अधिक थी।
कांचीपुरम के उत्कृष्ट प्रदर्शन में राज्य सरकार के सक्रिय समर्थन का बड़ा योगदान रहा है। राज्य में सबसे अधिक 28 औद्योगिक पार्क में से आठ यहीं हैं जिनमें तीन बड़े औद्योगिक पार्क शामिल हैं। ओरगाडम पार्क अपनी ऑटोमोबाइल फैक्टरियों के लिए प्रसिद्ध है, जहां रॉयल एनफील्ड, आयशर मोटर्स और डैमलर ट्रक जैसी कंपनियां स्थित हैं। श्रीपेरुम्बुदुर 2007 से सैमसंग, डेल और हाल ही में फॉक्सकॉन की फैक्टरियों के साथ एक इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में उभरा है। और सिरुसेरी, खासकर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज द्वारा 2012 में अपना परिसर स्थापित करने के बाद एक आईटी हब बनता जा रहा है।
कांचीपुरम की क्षमता को पहचानते हुए और इसे एक आर्थिक शक्ति केंद्र के रूप में विकसित करना, नए केंद्रों को शुरू से विकसित करने के बजाय मौजूदा केंद्रों पर ध्यान केंद्रित करने के महत्त्व को फिर से साबित करता है। हालांकि, तमिलनाडु अन्य केईसी में कांचीपुरम जैसी सफलता दोहराने में सक्षम नहीं रहा है। वर्ष 2002 से 2023 के बीच कोयंबत्तूर की विकास दर 7.9फीसदी ही रही। इसी तरह मदुरै और तिरुचिरापल्ली की विकास दर क्रमशः 6.6 फीसदी और 6 फीसदी रही।
इस गतिशीलता की कमी कोयंबत्तूर की राज्य के विनिर्माण जीडीपी में हिस्सेदारी में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो 2002-2023 के दौरान 23 फीसदी से घटकर 19 फीसदी हो गई। इसका मुख्य कारण कोयंबत्तूर में वस्त्र उद्योग में मध्यम स्तर की विशेषज्ञता और मदुरै और तिरुचिरापल्ली में वित्तीय सेवाओं में कमजोर विशेषज्ञता है।
अगली सरकार के लिए 2030 का लक्ष्य हासिल करना एक चुनौती भरा काम है। सबसे पहले, राज्यव्यापी विकास के गुणों में लगातार सुधार करना होगा। हालांकि तमिलनाडु अधिकांश क्षेत्रों में मजबूत है, लेकिन वैश्विक स्तर पर तुलना करने पर यह औसत दर्जे का ही है। राज्य में बौनेपन से ग्रस्त बच्चों का प्रतिशत थाईलैंड से लगभग दोगुना है, जबकि चीन में उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर 30 फीसदी अधिक है। दूसरा, चेन्नई शहरी क्षेत्र को विश्व स्तरीय विनिर्माण और सेवा केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। लगभग 100 अरब डॉलर के जीडीपी के साथ, यह अभी भी चीन के ग्वांगचू के आकार का एक चौथाई है, जो विकास की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।
तीसरा, वित्त क्षेत्र में विशेषज्ञता बढ़ाकर मदुरै और तिरुचिरापल्ली के तीव्र विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करना होगा। कोयंबत्तूर के विकास को गति देने के लिए गंभीर प्रयास करने पड़ सकते हैं, क्योंकि भारत के उन सभी केंद्रों में धीमी वृद्धि एक आम समस्या है जो श्रम-प्रधान उद्योगों में विशेषज्ञता रखते हैं। तमिलनाडु इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि कैसे एक राज्य ने विकास के मूलभूत सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करके अपने आर्थिक प्रदर्शन को बेहतर बनाया है।
(लेखक अर्थशास्त्री हैं। ये उनके निजी विचार हैं)