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GST 2.0: 40% जीएसटी में बदलाव से सॉफ्ट ड्रिंक और सिगरेट वितरकों की कार्यशील पूंजी अटकी

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GST reform: एरेटेड ड्रिंक और सिगरेट पर बढ़े हुए 40% GST और उपकर के कारण वितरकों की नकदी फंसी, आपूर्ति श्रृंखला पर संकट

Last Updated- September 20, 2025 | 11:14 AM IST
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एरेटेड ड्रिंक्स और सिगरेट पर उपकर जमा होने के मामले में वितरकों ने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखा है। नई कर व्यवस्था में इन वस्तुओं को अब 40 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे रखा गया है और इस पर उपकर जमा होने के कारण आपूर्ति श्रृंखला में नकदी की कमी हो गई है।
वितरकों ने वित्त मंत्रालय को लिखे गए पत्र में कहा है कि एरेटेड ड्रिंक्स और सिगरेट पर उपकर संचित होने के कारण आपूर्ति श्रृंखला में नकदी की कमी हो गई है, क्योंकि अब ये वस्तुएं 40 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में आ गई है।

पुरानी जीएसटी व्यवस्था में दोनों वस्तुएं 28 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में आती थीं और इन पर 12 प्रतिशत मुआवजा उपकर लगता था। अब कर ढांचे का पुनर्गठन किया गया है और इन पर 40 प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया है। ऐसे में पहले खरीदे जा चुके माल का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) जमा हो गया है। ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (एआईसीपीडीएफ) का कहना है कि इससे पूरे भारत में सॉफ्ट ड्रिंक और सिगरेट वितरकों और खुदरा विक्रेताओं  की कार्यशील पूंजी फंस गई है, क्योंकि पैसा उपकर क्रेडिट में फंस गया है, जिसका इस्तेमाल जीएसटी भुगतान के लिए नहीं किया जा सकता। इसकी वजह से कारोबारियों को नकदी की कमी हो गई है। जीएसटी दर का समायोजन किया गया है, लेकिन ग्राहकों के लिएअंतिम मूल्य यथावत बना रहेगा।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में आम आदमी पर कर का बोझ कम करने के लिए जीएसटी सुधारों की घोषणा करते हुए उसे दीपावली का तोहफा करार दिया था।

सरकार ने 3 सितंबर को 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत जीएसटी  स्लैब को हटा दिया और कई वस्तुओं को 5 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 40 प्रतिशत जीएसटी  के दायरे में नए सिरे से वर्गीकृत किया गया।

एआईसीपीडीएफ पत्र में कहा, ‘यह स्थिति कई छोटे और मझोले वितरकों के कारोबार की व्यावहारिकता खतरे में पड़ गई है, जो पहले से ही कम मुनाफे पर काम कर रहे है और नकदी के रोटेशन पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। खुदरा विक्रेता भी दबाव में हैं।’

उद्योग संगठन ने कहा कि सरकार से उद्योग प्रतिनिधियों और एआईसीपीडीएफ जैसे कारोबारी संगठनों के साथ परामर्श स्थापित करने पर विचार करने के लिए कहा गया है ताकि व्यावहारिक समाधानों पर चर्चा की जा सके और इस क्षेत्र में दीर्घकालिक संकट से बचा जा सके।

पत्र में यह भी कहा गया है, ‘यह मुद्दा तात्कालिक चिंता का विषय है, क्योंकि आगामी त्योहारी सीजन में कार्यशील पूंजी की जरूरत है। अगर संचित उपकर का इस्तेमाल नहीं हो पाता है तो इससे कारोबारियों  को दिक्कत होगी। आपके कार्यालय से समय पर हस्तक्षेप किए जान से लाखों कारोबारियों की सुरक्षा के साथ एफएमसीजी और तंबाकू और एरेटेड ड्रिंक उद्योग के बीच आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाने में मदद मिल सकेगी।’

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First Published - September 20, 2025 | 11:14 AM IST

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