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NSDL का बहुप्रतीक्षित IPO लिस्टिंग के करीब, CEO विजय चंडोक ने बताया- क्यों इस प्रक्रिया में इतनी देरी हुई

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एनएसडीएल के CEO विजय चंडोक ने कहा कि आईपीओ से कंपनी की नियामकीय जरूरतें पूरी होंगी और भारत के पूंजी बाजार में समावेशन को लेकर संस्था की भूमिका और मजबूत होगी।

Last Updated- July 25, 2025 | 9:58 PM IST
Vijay Chandok
एनएसडीएल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्या​धिकारी विजय चंडोक

भारत की सबसे बड़ी डिपॉजिटरी एनएसडीएल अपना डीआरएचपी सौंपने के दो साल बाद दलाल पथ पर दस्तक देने को तैयार है। बहुप्रती​क्षित आईपीओ से पहले एनएसडीएल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्या​धिकारी विजय चंडोक ने लिस्टिंग से संबं​धित नियामकीय पहलुओं, खुदरा निवेशकों में तेज इजाफे और मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन (एमआईआई) के लिए आगे की राह पर अपनी राय साझा की। मुंबई में सुंदर सेतुरामन के साथ बातचीत में एनएसडीएल प्रमुख ने सीडीएसएल के प्रतिस्पर्धी दबाव, नए राजस्व स्रोतों और तकनीकी चुनौतियों से जुड़े सवालों के जवाब दिए। उनसे बातचीत के अंश:

एनएसडीएल के लिए आईपीओ कितना महत्त्वपूर्ण है और आईपीओ के बाद कंपनी में क्या बदल जाएगा?

एनएसडीएल के लिए आईपीओ मुख्य रूप से नियामक की शेयरधारिता शर्तों को पूरा करने के लिहाज से अहम है। इन नियामकीय जरूरतों को पूरा करना हमारे लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है। निर्धारित समय सीमा के भीतर इन्हें पूरा कर रहे हैं, यह हमारे लिए खुशी की बात है। भविष्य में हमारा ध्यान राष्ट्र निर्माण के अपने मिशन पर, खाससतौर पर भारत के पूंजी बाजारों के विकास पर। एनएसडीएल ने पिछले 30 वर्षों में ग्राहक शिक्षा, सुरक्षा, विश्वास निर्माण और पूंजी बाजारों में समावेशन पर जोर देते हुए अहम योगदान दिया है। आईपीओ के बाद भी ये हमारे प्राथमिक लक्ष्य बने रहेंगे।

आईपीओ प्रक्रिया में बार-बार विलंब और विस्तार क्यों हुआ?

आईपीओ से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाओं का सतर्कता के साथ पालन किया गया। इनमें से कुछ प्रक्रियाओं में नियामक के साथ बातचीत भी शामिल थी। देरी केवल इन प्रक्रियाओं पर अमल के कारण हुई। अब हम अंतिम चरण में हैं। इन प्रक्रियाओं से संबंधित विशिष्ट विवरण गोपनीय हैं और ये हमारे तथा नियामकों के बीच ही बने रहेंगे।  

महामारी के बाद का दौर डीमैट खातों की वृद्धि के लिए कैसा रहा है और आगे क्या संभावना है?

कोविड-19 महामारी के कारण डिजिटलीकरण की दिशा में बड़े बदलाव और भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे (इंडिया स्टैक) के समर्थन के कारण डीमैट खातों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। फलस्वरूप उपभोक्ता और निवेशक व्यवहार में बड़ा बदलाव आया और खातों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई। इस दौरान उद्योग की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) 20 प्रतिशत के मध्य तक पहुंच गई। उद्योग के एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि अगले कुछ वर्षों तक डीमैट खातों की वृद्धि दर दो अंक में लगभग 12 प्रतिशत रहेगी जो पिछले ऊंचे स्तर से थोड़ी कम है।  

सीडीएसएल के पास एनएसडीएल से ज्यादा डीमैट खाते हैं। एनएसडीएल इस बढ़ोतरी का ज्यादा हिस्सा क्यों नहीं ले पाई?

हमारा बिजनेस मॉडल काफी विविधतापूर्ण है और डिपॉजिटरी क्षेत्र के कई क्षेत्रों में हम अग्रणी हैं। जहां हम पीछे रह जाते हैं, वहां हम सेवाओं में कमियों को पहचानने और व्यक्तिगत दृष्टिकोण के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। डीमैट खातों में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाना हमारी व्यावसायिक प्राथमिकता है।

मुनाफे में सीडीएसएल आगे क्यों है?

2022 और 2025 के बीच एनएसडीएल के डीमैट खातों की वृद्धि 13 प्रतिशत रही जबकि हमारे प्रतिस्पर्धी ने इसी पैमाने पर लगभग 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। एनएसडीएल के लिए राजस्व वृद्धि करीब 19 फीसदी थी और कर बाद लाभ 21 फीसदी तक बढ़ा। ये अच्छे आंकड़े हैं और प्रतिस्प​​र्धियों से तुलना की जा सकती है। 

आईपीओ का आकार घटाया गया है। ऐसा क्यों किया गया?

कई पुराने मुख्य शेयरधारकों ने अपनी मूल नियोजित बिक्री को कम करने का फैसला किया है जिससे आईपीओ का आकार घट गया है। अन्य निवेशकों ने अपने शेयर अपने पास रखने का फैसला किया है, यह फैसला उनका स्वयं का निर्णय है।

 

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First Published - July 25, 2025 | 9:58 PM IST

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