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क्यों रिलायंस फंसी जियो-फेसबुक डील के मामले में, जानिए पूरी कहानी

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सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस की वह अपील खारिज कर दी जिसमें कंपनी ने जियो–फेसबुक डील की जानकारी समय पर न देने पर लगाए गए 30 लाख रुपये के जुर्माने को चुनौती दी थी

Last Updated- December 02, 2025 | 1:25 PM IST
Reliance Share before RIL AGM

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने सेबी और सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी SAT द्वारा लगाए गए 30 लाख रुपये के जुर्माने को चुनौती दी थी। यह जुर्माना जियो और फेसबुक के बीच हुई बड़ी डील की जानकारी समय पर शेयर बाजार को न देने के लिए लगाया गया था। यह जानकारी बार एंड बेंच की रिपोर्ट में सामने आई है।

सेबी ने क्यों लगाया था जुर्माना

जून 2022 में सेबी ने रिलायंस और कंपनी के दो कम्प्लायंस अफसरों – सवित्री पारेख और के. सेथुरमन पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। सेबी का कहना था कि रिलायंस ने जियो–फेसबुक डील से जुड़ी जानकारी समय पर स्टॉक एक्सचेंजों को नहीं दी। सेबी के मुताबिक, यह मामला इंसाइडर ट्रेडिंग रोकने वाले नियमों के उल्लंघन से जुड़ा था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि यह मामला तथ्यों पर आधारित है और इसमें ऐसा कोई कानूनी सवाल नहीं है जिसे सुप्रीम कोर्ट देखने की जरूरत समझे। इसलिए रिलायंस की अपील को खारिज कर दिया गया।

मामला क्या है

सेबी के मुताबिक जियो और फेसबुक के बीच 43,574 करोड़ रुपये की यह बड़ी डील मार्च 2020 में लगभग तैयार हो चुकी थी। अप्रैल 2020 में दोनों कंपनियों ने एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए और कुछ दिनों बाद रिलायंस ने इस निवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी।

लेकिन इससे पहले ही मार्च 2020 में रॉयटर्स और फाइनेंशियल टाइम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट दी थी कि फेसबुक जियो में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है। इन खबरों के बाद रिलायंस के शेयरों में तेज उछाल आया था।

सेबी का कहना था कि जब बाजार इस खबर पर इतनी प्रतिक्रिया दे रहा था, तो रिलायंस को तुरंत इसका स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए था। जब कंपनी ने ऐसा नहीं किया, तो यह सेबी के नियमों का उल्लंघन माना गया।

SAT ने भी जुर्माना सही ठहराया

जुर्माना लगाए जाने के बाद रिलायंस ने SAT में अपील की, लेकिन मई 2024 में SAT ने भी कंपनी की दलीलें खारिज कर दीं। SAT ने कहा कि फरवरी 2020 के अंत तक डील के बारे में काफी जानकारी स्पष्ट थी और यह इतनी महत्वपूर्ण थी कि इससे शेयर की कीमत प्रभावित हो सकती थी।

SAT ने यह भी कहा कि मीडिया में आई खबरें तब तक ‘पब्लिक जानकारी’ नहीं मानी जातीं जब तक कंपनी खुद इसकी पुष्टि न करे। इसलिए लीक होने के बाद रिलायंस को आधिकारिक स्पष्टता देनी चाहिए थी।

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First Published - December 2, 2025 | 1:25 PM IST

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