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Electric Vehicles Sales: 2030 तक EV की बिक्री होगी 40 फीसदी

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Last Updated- December 14, 2022 | 11:59 PM IST
EV Sales

देश भर में बिकने वाले सभी श्रेणियों के वाहनों में 35 से 40 फीसदी वाहन वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रिक होंगे। यह संख्या इस साल के मात्र दो प्रतिशत की तुलना में काफी ज्यादा है। बैन ऐंड कंपनी की आज जारी रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है। यह संख्या प्रत्येक वर्ष बेचे जाने वाले 1.4 से 1.6 करोड़ नए इलेक्ट्रिक वाहनों ( Electric Vehicles Sales)के बराबर होगी।

40 से 50 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बेचे जाने की उम्मीद

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई श्रेणियों में (जैसे दोपहिया वाहन श्रेणी, जो दिसंबर में लगभग चार से पांच फीसदी तक पहुंच गई है) पहले ही मासिक आधार पर नजर आने वाला यह बदलाव वर्ष 2026 में और अधिक स्पष्ट हो जाएगा, जब सभी श्रेणियों में 40 से 50 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बेचे जाने की उम्मीद की जा रही है। कुल बिक्री में इनका योगदान 15 से 20 प्रतिशत होगा।

2030 तक ईवी पर आधारित नया राजस्व संग्रह 76-100 अरब डॉलर हो जाएगा

इतना ही नहीं, रिपोर्ट का यह भी कहना है कि इस पैठ के अनुमानित स्तर के कारण वित्त वर्ष 2030 तक ईवी पर आधारित नया राजस्व संग्रह 76 अरब डॉलर से लेकर 100 अरब डॉलर (जिसमें बैटरी की लागत और अन्य पुर्जों की मूल्य श्रृंखला में कुछ दोहरी गणना भी शामिल है) के बीच हो जाएगा। इसमें से चार पहिया वाहनों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत होगी और इसके बाद दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत तथा शेष हिस्सेदारी अन्य सभी वाहनों की रहेगी।

यह भी पढ़े: India Auto sales: यात्री वाहनों की थोक बिक्री नवंबर में 28 फीसदी बढ़ी- SIAM

इलेक्ट्रिक यात्री कारों में टाटा मोटर्स की अगुआई

बैन का अनुमान है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन, जिनका वर्ष 2022 के दौरान कुल दोपहिया बिक्री में दो प्रतिशत हिस्सा रहेगा, वर्ष 2026 में बढ़कर 20 प्रतिशत तक हो जाएगा तथा वर्ष 2030 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 40 से 45 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। वर्तमान में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के मामले में ज्यादातर टाटा मोटर्स की अगुआई है, जिसका वर्ष 2022 में बाजार में एक प्रतिशत से भी कम योगदान है, वर्ष 2026 में लगभग सात से 10 प्रतिशत तक का खासा इजाफा होगा और वर्ष 2030 तक संपूर्ण कार बाजार में 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक पहुंच हिस्सेदारी हो जाएगी।

वाणिज्यिक वाहन श्रेणी में हल्के वाणिज्यिक वाहन (एलसीवी) और बस श्रेणी (वर्तमान में बसें मुख्य रूप से राज्यों के निगमों आदि के सरकारी ऑर्डर पर निर्भर हैं) के मामले में वर्ष 2030 तक पर्याप्त रूपांतरण नजर आएगा, जो एलसीवी में 20 से 25 प्रतिशत और बसों में 15 से 20 प्रतिशत होगा।

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First Published - December 14, 2022 | 8:06 PM IST

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