विशाखापत्तनम से लगभग 30 किलोमीटर दूर एक गांव है हतारलुवाडा। पूर्वी घाट के पहाड़ों से घिरा यह गांव शहरों की कोलाहल से दूर काफी शांत है। मंगलवार को इस कृषि प्रधान इलाके में गूगल क्लाउड इंडिया एआई हब के निर्माण कार्य की शुरुआत हुई। इस परियोजना पर कुल 15 अरब डॉलर निवेश होगा। इसे भारत के इतिहास में सबसे बड़े विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) में एक माना जा रहा है।
ये पहाड़ियां अगले पांच वर्षों में ‘विशाखापत्तनम को एआई-पत्तनम’ में बदलने की राह तैयार कर सकती हैं। हरे-भरे पहाड़, धान के खेत और आम के बगीचे इस क्षेत्र में आने वाले किसी भी व्यक्ति को आनंदित कर सकते हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने यहां 1 गीगावॉट एआई डेटा सेंटर की आधारशिला रखी जिसे गूगल अदाणीकॉनेक्स और एयरटेल की नेक्स्ट्रा (एयरटेल की डेटा सेंटर सेवा प्रदान करने वाली कंपनी) के साथ मिलकर स्थापित कर रही है।
इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि विशाखापत्तनम के समुद्री तट जल्द ही भारत के तकनीकी परिदृश्य को नया रूप दे सकते हैं क्योंकि तीन नए सबसी केबल (समुद्र के भीतर तार) नेटवर्क लैंडिंग भारत, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम एशिया और अमेरिका के बीच एक अहम डिजिटल पुल का निर्माण करेंगे।
गूगल 15 अरब डॉलर का यह निवेश 2026 से 2030 तक अगले पांच वर्षों में करेगी। माना जा रहा है कि यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य हासिल करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है। एआई हब में कई डेटा सेंटर कैंपस शामिल होंगे और यह उच्च-क्षमता वाली कंप्यूटिंग को ताकत देगा और व्यवसायों को एआई-आधारित समाधान बनाने एवं उनका विस्तार करने में मदद करेगा।
नायडू ने मंगलवार को कार्यक्रम के अवसर पर कहा, ‘जब गूगल, अदाणी और एयरटेल तीनों एक साथ काम करेंगी तो क्रियान्वयन स्वतः ही तीव्र गति से हो जाएगा। हमें उम्मीद है कि इस परियोजना का उद्घाटन सितंबर 2028 तक हो जाएगा।’
अदाणीकॉनेक्स और एयरटेल एनएक्सट्रा डेटा सेंटर भवनों और संपर्क ढांचे (कनेक्टिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण की अगुवाई करेंगी। इसकी मदद से गूगल उन्नत एआई क्षमताओं को तैनात करने और पूरे भारत में डिजिटल सेवाओं का विस्तार करने में सक्षम हो पाएगी। इस समारोह से पहले मुख्यमंत्री ने गूगल एक्सपीरियंस जोन का निरीक्षण किया।
केंद्रीय सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा,‘मैं गूगल टीम को उन तीन समुद्री केबलों के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं जो विशाखापत्तनम में बिछाई जाएंगी। एक केबल ऑस्ट्रेलिया तक जाएगी और फिर प्रशांत महासागर के रास्ते अमेरिका के पश्चिमी तट तक पहुंचेगा। दूसरा केबल पश्चिम एशिया से होते हुए यूरोप और फिर अमेरिका तक जाएगा। तीसरा केबल केप ऑफ गुड होप, अफ्रीकी क्षेत्र के चारों ओर से गुजरते हुए सीधे अमेरिका तक जाएगा।’
राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए तरलुवाडा, रामबिल्ली और अदावीराम क्षेत्रों में 601 एकड़ जमीन दी की है। अदाणी समूह के निदेशक जीत अदाणी ने कहा,‘आज भारत में लगभग 1.3 गीगावॉट डेटा सेंटर क्षमता है। विशाखापत्तनम में हम एक ही स्थान पर लगभग 1 गीगावॉट क्षमता स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। भारत एआई अवसंरचना के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है।’
यह परियोजना अदाणी समूह की उस व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है जिसके तहत वह अगले दशक में भारत की एआई, ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने के लिए 100 अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है।
भारती एयरटेल के कार्यकारी उपाध्यक्ष गोपाल विट्टल ने कहा, ‘गूगल और अदाणी के साथ इस ऐतिहासिक एआई हब के निर्माण में हमारी रणनीतिक साझेदारी भारत की डिजिटल महत्त्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में योगदान देंगे। विशाखापत्तनम विश्व के एआई मानचित्र पर एक नए केंद्र के रूप में उभरेगा। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत न केवल अपने लोगों के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए नवाचार और सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करे। हमारे अत्याधुनिक डेटा केंद्रों का संपूर्ण तंत्र, हरित ऊर्जा का इस्तेमाल, ऑल इंडिया अल्ट्रा-लो लेटेंसी फाइबर और अगली पीढ़ी के केबल लैंडिंग स्टेशन की मदद से विशाखापत्तनम में बड़े पैमाने पर विश्व-स्तरीय एआई ढांचा तैयार किया जाएगा।’
उन्होंने कहा कि संपूर्ण परियोजना को वैश्विक स्तर पर मजबूत समर्थन प्राप्त है जिसमें एनएक्सट्रा लगभग 400 मेगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल करेगी ताकि भारत 2031 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य की तरफ कदम बढ़ा सके।