टाटा मोटर्स की गाड़ियां खरीदना अब ग्राहकों की जेब पर थोड़ा और भारी पड़ने वाला है। कंपनी ने अपने पैसेंजर व्हीकल पोर्टफोलियो की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई दरें 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो जाएंगी। ऑटोमोबाइल सेक्टर में बढ़ती लागत और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए कंपनी ने यह कदम उठाया है।
कंपनी के मुताबिक, इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) यानी पेट्रोल और डीजल से चलने वाली कारों की रेंज में औसतन 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी। हालांकि, यह बढ़ोतरी सभी गाड़ियों पर एक समान नहीं होगी। मॉडल और उसके अलग-अलग वेरिएंट के आधार पर कीमत बढ़ने का ग्राफ अलग-अलग हो सकता है। टाटा मोटर्स ने कहा है कि उत्पादन लागत में लगातार हो रहे इजाफे की वजह से यह फैसला लेना जरूरी हो गया था, ताकि कारोबार पर पड़ रहे बोझ को कुछ हद तक कम किया जा सके।
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ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री फिलहाल कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है। स्टील और अन्य जरूरी कच्चे माल (रॉ मैटेरियल) की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ सप्लाई चेन से जुड़ी लागत भी काफी बढ़ गई है। सिर्फ टाटा मोटर्स ही नहीं, बल्कि लग्जरी कार निर्माता कंपनियां भी इन परिस्थितियों से जूझ रही हैं। टाटा मोटर्स का कहना है कि वह काफी समय से बढ़ती लागत का बड़ा हिस्सा खुद ही वहन कर रही थी, लेकिन अब इन खर्चों का कुछ भार ग्राहकों पर डालना कंपनी की मजबूरी बन गया है।
दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने सिर्फ सवारी गाड़ियों के ही नहीं, बल्कि कमर्शियल व्हीकल यानी ट्रक और बसों के दाम भी बढ़ाने का ऐलान किया है। कमर्शियल रेंज की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी और यह भी 1 अप्रैल से ही प्रभावी होगी।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV) पिछले कुछ सालों में भारतीय बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरी है। नेक्सन और टियागो जैसे मॉडल्स के जरिए कंपनी ने न सिर्फ सुरक्षा और डिजाइन के मामले में अपनी पहचान बनाई है, बल्कि इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में भी दबदबा कायम किया है। हालांकि, मौजूदा कीमतों में बदलाव मुख्य रूप से पारंपरिक इंजन वाली गाड़ियों पर केंद्रित है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह मामूली बढ़ोतरी ग्राहकों के फैसले पर बहुत ज्यादा असर नहीं डालेगी, लेकिन यह ऑटो सेक्टर में बढ़ते वित्तीय दबाव का संकेत जरूर है।