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ग्रामीण बाजार में कारों की बिक्री पकड़ रही रफ्तार, चालू वित्त वर्ष में 11.4 फीसदी का इजाफा; ये हैं बड़े कारण

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चालू वित्त वर्ष में अभी तक ग्रामीण बाजारों में कारों की बिक्री में 11.4 फीसदी का इजाफा हुआ जबकि शहरी बाजार में बिक्री लगभग ​स्थिर रही।

Last Updated- February 09, 2025 | 10:14 PM IST
Car sales

ग्रामीण बाजारों में यात्री वाहनों की बिक्री 2025 में पटरी पर लौट आई है। जनवरी में ग्रामीण इलाकों में यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री में 18.75 फीसदी की तेजी देखी गई। 

जनवरी में कारों की थोक बिक्री (डीलर को की गई आपूर्ति) एक अंक में बढ़ी जबकि कुल खुदरा बिक्री में 15.5 फीसदी का इजाफा हुआ। इससे मूल उपकरण विनिर्माताओं के पास अनबिके वाहनों की तादाद भी घटी है। 

उदाहरण के लिए मारुति सुजूकी के डीलरों के पास अब 18 से 20 दिन की जरूरत को पूरा करने के लिए ही अनबिके वाहन हैं। मारुति के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ग्रामीण बाजारों में जनवरी में बिक्री 15.5 फीसदी बढ़ी है। चालू वित्त वर्ष में अभी तक ग्रामीण बाजारों में कारों की बिक्री में 11.4 फीसदी का इजाफा हुआ जबकि शहरी बाजार में बिक्री लगभग ​स्थिर रही।

जनवरी में दिसंबर की तुलना में कुल यात्री वाहनों की बिक्री 58.7 फीसदी बढ़ी है। डीलरों ने कहा कि जनवरी में वाहनों की बिक्री में इतनी तेजी इसलिए आई क्योंकि ग्राहक ने कार तो दिसंबर में खरीद ली मगर ‘2025 मॉडल इयर’ वाली कार लेने के लिए आपूर्ति जनवरी में ली।

वाहन डीलरों के संगठन फाडा ने कहा, ‘कुल बिक्री में शहरी बाजार की हिस्सेदारी 60.8 फीसदी से मामूली बढ़कर 61.8 फीसदी रही मगर ग्रामीण बाजारों में जनवरी के दौरान पिछले साल की समान अव​धि की तुलना में 18.57 फीसदी बिक्री बढ़ी है। शहरी इलाकों में कारों की बिक्री में वृद्धि 13.72 फीसदी रही।’

फाडा ने कहा कि अनबिके वाहनों के स्तर में भी कमी आई है। डीलरों के पास अनबिके वाहनों का स्टॉक 5 दिन कम होकर 50 से 55 दिन का रह गया है। फाडा के अनुसार पिछले साल पुराने मॉडल को बेचने के लिए दी गई भारी छूट से भी इन्वेंट्री घटाने में मदद मिली।

प्रमुख वाहन विनिर्माताओं ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि अब उनके पास 30 दिन की जरूरत के लिए ही अनबिके वाहनों का स्टॉक रह गया है। टाटा मोटर्स, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा और ह्युंडै मोटर इंडिया ने कहा कि उनके डीलरों के पास अब चार हफ्ते से 30 दिन तक की जरूरत के लिए ही अनबिके वाहनों का स्टॉक रह गया है।

ह्युंडै मोटर के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य परिचालन अ​धिकारी तरुण गर्ग ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘वर्तमान में मांग की गति स्थिर है और हमारे डीलरों के पास करीब 4 सप्ताह की जरूरत के लिए अनबिके वाहनों का स्टॉक है। भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में 25 आधार अंक की कटौती की घोषणा की है जिससे आगे मांग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।’

ह्युंडै की बिक्री में ग्रामीण बाजारों का योगदान लगातार बढ़ रहा है। गर्ग ने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों से ग्रामीण बाजार सही मायने में ह्यंडै की रणनीति की बुनियाद रहा है। ग्रामीण बाजारों में हमारी हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। हम बिक्री और सर्विस दोनों के 

दृ​ष्टिकोण से ग्रामीण बाजारों में अपनी मौजूदगी को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘जनवरी में ग्रामीण बाजारों में हमारी बिक्री 7.4 फीसदी बढ़ी जबकि अप्रैल से जनवरी के दौरान बिक्री में 6.3 फीसदी का इजाफा हुआ।’

गर्ग का मानना है कि ग्रामीण और शहरी बाजारों के बीच की खाई सिकुड़ रही है। पैदावार बढ़ने, न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा और किसान क्रेडिट कार्ड आदि के जरिये कंपनी की बिक्री में ग्रामीण बाजारों के योगदान में सुधार आगे भी जारी रहेगा। 

गर्ग ने कहा, ‘इसके अलावा सड़क बुनियादी ढांचे में लगातार सुधार हो रहा है जिससे ग्रामीण मांग बढ़ रही है। कथित ‘ग्रामीण’ और ‘शहरी’ के बीच का अंतर अब कम हो रहा है और ग्रामीण ग्राहकों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं।’

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के कार्यकारी निदेशक और सीईओ (वाहन एवं कृषि क्षेत्र) राजेश जेजुरिकर ने कहा, ‘कंपनी को ग्रामीण बाजारों में मजबूत सुधार दिखा है। साथ ही शहरी मांग भी बेहद मजबूत है।’

उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए शहरी और ग्रामीण बाजारों में वृद्धि एकसमान रही है। कुछ कंपनियों की बिक्री ग्रामीण बाजारों में शहरी इलाकों से ज्यादा बढ़ी है मगर हमारे लिए शहरी और ग्रामीण बाजारों में वृद्धि समान रूप से रही है।’

जेजुरिकर ने कहा, ‘यह निश्चित रूप से हमारे विभिन्न तरह के वाहनों की वजह से है। कंपनी के पास 30 दिन की जरूरत के लिए अनबिके वाहनों का स्टॉक है, जो हमारे मानक के अनुरूप है।’

वाहन विनिर्माओं को उम्मीद है कि बजट में आयकर में रियायत मिले और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर में कटौती करने से 10 लाख से 25 लाख रुपये कीमत वाली कारों की मांग बढ़ेगी।

वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद विश्लेषकों के साथ बातचीत में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीलकल्स ऐंड टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रबंध निदेशक शैलेष चंद्रा ने कहा था कि 18 लाख रुपये से ऊंची कीमत वाली कारों में काफी प्रतिस्पर्धा बढ़ने वाली है।

उन्होंने कहा, ‘लेकिन हमें 12 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों का लाभ मिलेगा, जो मूल रूप से शहरी मगर ईवी कारें हैं। इस सेगमेंट में उतनी प्रतिस्पर्धा नहीं है इसलिए हम छोटे-मझोले शहरों में भी प्रवेश करने के लिए इस अवसर का लाभ उठाएंगे।’

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First Published - February 9, 2025 | 10:08 PM IST

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