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एस्सेल दिवालिया केस में बड़ा खुलासा! फर्जी जजमेंट्स का इस्तेमाल, सुप्रीम कोर्ट की नजर में मामला

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एस्सेल दिवालिया मामले में फर्जी और अस्तित्वहीन न्यायिक फैसलों के इस्तेमाल के आरोपों की जांच प्रशासनिक स्तर पर चल रही है, सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर फैसला सुरक्षित रखा।

Last Updated- May 21, 2026 | 10:39 AM IST
Supreme Court
Representative image

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट (एनसीएलटी) और राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील पंचाट (एनसीएलएटी) द्वारा कथित तौर पर नकली और मनगढ़ंत न्यायिक मिसालों के इस्तेमाल को लेकर चिंताएं (जो एस्सेल इन्फ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े दिवाला मामले में इसे पुष्ट कर रही थीं) पहले से ही प्रशासनिक पक्ष पर जांची जा रही थीं और एक समिति के समक्ष रखी गई थीं।

इस बीच, अदालत ने कंपनी की निलंबित निदेशक पूजा रमेश सिंह द्वारा दायर अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे के पीठ में एस्सेल इन्फ्राप्रोजेक्ट्स के ख़िलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के आदेशों को सिंह द्वारा दी गई चुनौती पर सुनवाई की जा रही थी। सुनवाई के दौरान, सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने तर्क दिया कि एनसीएलटी और एनसीएलएटी, दोनों ने ही छह ऐसे निर्णयों पर भरोसा किया था जो या तो अस्तित्व में ही नहीं थे, या फिर उन सिद्धांतों का समर्थन करने में विफल रहे थे जिनका श्रेय उन्हें दिया
गया था।

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First Published - May 21, 2026 | 10:39 AM IST

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