दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक्स कॉर्प को अदालत की कार्यवाही के उन दृश्यों वाली पोस्ट हटाने का आदेश दिया, जिसमें अरविंद केजरीवाल 13 अप्रैल को एक अलग पीठ के समक्ष मामले की बहस वकील के बजाय स्वयं कर रहे थे। यह कार्यवाही केजरीवाल की उस याचिका से संबंधित है, जिसमें आबकारी नीति मामले में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से मामले को हटाने की मांग की गई थी।
अदालत का यह निर्देश वकील वैभव सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें केजरीवाल, कुछ राजनीतिक हस्तियों और पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ कथित तौर पर अनधिकृत रिकॉर्डिंग और ऑडियो-विजुअल सामग्री के प्रसार के संबंध में अवमानना कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है।
मेटा प्लेटफॉर्म्स की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने जस्टिस वी. के. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ को बताया कि रजिस्ट्रार जनरल के संचार के बाद चिह्नित सामग्री को पहले ही हटा दिया गया है। गूगल एलएलसी के वकील ने कहा कि कुछ यूआरएल में प्रासंगिक फुटेज नहीं पाया गया। इसके बावजूद अदालत ने निर्देश दिया कि यदि ऐसी कोई भी सामग्री पाई जाए तो उसे फौरन हटाया जाए।