केंद्र सरकार ने येस बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के अतिरिक्त टियर-1 (एटी1) बॉन्ड बट्टा खाते में डालने को सही ठहराते हुए आज कहा कि 2020 के पुनर्गठन के दौरान जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने और ऋणदाता के अस्तित्व को बचाने के लिए यह निर्णय आवश्यक था। अदालत में केंद्र सरकार की ओर से मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कैबिनेट का एक प्रस्ताव पेश किया जो एटी1 बॉन्ड के बट्टा खाते में डालने का मार्ग प्रशस्त करने वाले केंद्र के मार्च 2020 के फैसले से संबंधित था।
इसके पहले सुनवाई के दौरान न्यायालय ने वित्त मंत्रालय को फटकार लगाई और उन दस्तावेजों को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जिनके आधार पर एटी1 बॉन्ड को बट्टा खाते में डालने का निर्णय लिया गया था। इनमें कैबिनेट प्रस्ताव की प्रति, निर्णय लेने वाली बैठक का ब्योरा आदि शामिल हैं।
केंद्र ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ अपनी दलील में कहा कि उस बॉन्ड को बट्टे खाते में डालना वित्तीय साधन के डिजाइन के अनुरूप था। उसे बचाव प्रक्रिया के दौरान नुकसान को कम करने के लिहाज से डिजाइन किया गया है। जब कोई बैंक आर्थिक रूप से मुश्किल में आता है तो ये बॉन्ड नुकसान को रोकते हैं।सरकार ने कहा कि यह संरचना जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए थी।
मेहता ने अदालत को बताया कि प्रत्येक एटी1 बॉन्ड का अंकित मूल्य 10 लाख रुपये है। मगर 9 फीसदी से अधिक रिटर्न मिलने के कारण ये ऋण पत्र निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं जबकि इसमें वित्तीय संकट के दौरान बट्टा खाते में डाले जाने का जोखिम बना रहता है।
केंद्र ने कहा कि बैंकों ने सामूहिक रूप से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एटी1 बॉन्ड जारी किए हैं। साथ ही आगाह किया गया है कि निर्धारित पूंजी सीमा का उल्लंघन होने के बाद बट्टे खाते में डालने की अनुमति न मिलने पर ऋणदाताओं को गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार ने कहा कि पुनर्गठन प्रक्रिया के दौरान एसबीआई ने येस बैंक में लगभग 8,000 करोड़ रुपये का निवेश यह सोचकर किया था कि एटी1 बॉन्ड को बट्टे खाते में डाला जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय उन अपीलों की सुनवाई कर रहा है जो बंबई उच्च न्यायालय के 2023 के फैसले के खिलाफ येस बैंक और आरबीआई द्वारा दायर की गई हैं। उस फैसले में एटी1 बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने के फैसले को रद्द कर दिया था।
जनवरी में शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी थी और बॉन्ड धारकों को नोटिस जारी किया था। मगर आज की सुनवाई के दौरान पीठ ने बट्टे खाते में डाले जाने पर बैंक और आरबीआई से कानूनी प्रावधानों के बारे में स्पष्टता मांगी।
न्यायालय ने याचिका दायर करने वालों को उनके निवेश के आधार पर बॉन्डधारकों का विस्तृत वर्गीकरण प्रदान करने का भी निर्देश दिया ताकि छोटे निवेशकों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। न्यायालय ने सभी हितधारकों को अपनी दलीलों पर एक नोट तैयार कर एक सप्ताह के भीतर अदालत में जमा करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।