facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

सार्वजनिक कैपेक्स के दम पर FY26 में निवेश मांग मजबूत रहने का अनुमान

Advertisement

एनएसओ के पहले अग्रिम अनुमान में सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय से निवेश और खपत मांग बढ़ने की उम्मीद

Last Updated- January 08, 2026 | 8:38 AM IST
capex

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएलओ) द्वारा वित्त वर्ष 2026 के लिए बुधवार को जारी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 की तुलना में चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2026) में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश की गति तेज रहने की उम्मीद है। सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में मजबूत उछाल के कारण इसमें तेजी का अनुमान लगाया गया है। वहीं कम महंगाई दर के कारण शहर और ग्रामीण इलाकों में अंतर कम होने की वजह से व्यापक आधार पर खपत मांग बढ़ सकती है।

एनएसओ के आंकड़ों से पता चलता है कि सकल नियत पूंजी सृजन (जीएफसीएफ) की हिस्सेदारी नॉमिनल हिसाब से वित्त वर्ष 2025 के 29.9 प्रतिशत से मामूली बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 30 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह अर्थव्यवस्था में बुनियादी ढांचे पर निवेश का संकेतक होता है। इसके अलावा वास्तविक हिसाब से निवेश मांग में वृद्धि की गति पिछले वित्त वर्ष के 7.1 प्रतिशत की तुलना में वित्त वर्ष 2026 में 7.8 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है।

इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च में एसोसिएट डायरेक्टर पारस जसराय ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय के कारण अर्थव्यवस्था में निवेश मांग तेज है, जिसमें वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान सालाना आधार पर 29.9 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है। बहरहाल व्यापक आधार वाला निजी पूंजीगत व्यय अभी शुरू नहीं हो पाया है।

उन्होंने कहा, ‘व्यापक आधार पर निजी पूंजीगत व्यय अभी होना बाकी है। बहरहाल बिजली (ताप और अक्षय ऊर्जा), पारेषण और वितरण, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और वाणिज्यिक, रिटेल रियल एस्टेट में पूंजीगत व्यय में वृद्धि की गति बनी हुई है।’

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि एजेंसी को उम्मीद है कि आगामी बजट में कुछ सुस्त रफ्तार के साथ सरकार पूंजीगत व्यय में वृद्धि बरकरार रखेगी। उन्होंने कहा, ‘हाल ही में सरकार ने व्यावसायिक माहौल को बेहतर बनाने और अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक वृद्धि की क्षमता को बढ़ाने के लिए विनियमन में ढील सहित घरेलू सुधारों को आगे बढ़ाया है। इन उपायों का निजी निवेश पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जो सुधार के कुछ संकेत देने लगे हैं।’

इसी तरह से जीडीपी में निजी अंतिम खपत व्यय (पीएफसीई), जो घरेलू खपत का संकेतक होता है, नॉमिनल हिसाब से वित्त वर्ष 2025 के 61.4 प्रतिशत से 10 आधार अंक बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 61.5 पर पहुंचने की उम्मीद है। बहरहाल निजी व्यय में वृद्धि गिरकर वित्त वर्ष 2026 में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2025 में 7.2 प्रतिशत था।

Advertisement
First Published - January 8, 2026 | 8:38 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement