सरकार ने साफ किया है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधान सभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ाने का उसका कोई इरादा नहीं है। सरकार ने गुरुवार को इसे लेकर आ रही खबरों को बेबुनियाद बताया और कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने इन खबरों को ‘फर्जी खबर’ करार दिया और कहा कि इनका मकसद जनता में ‘डर और दहशत’ पैदा करना है।
मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘ऐसी खबरों का मकसद नागरिकों में डर और दहशत पैदा करना है। ये खबरें भ्रामक हैं। सच्चाई यह है कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां पिछले 4 वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी वृद्धि से बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।’
इस बीच, सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को पेट्रोल पर लगभग 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि के बावजूद खुदरा कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं। यह जानकारी पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में दी।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक ईंधन की कीमतों में औसतन 25-28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की सूरत में शीर्ष मुद्रास्फीति लगभग 0.6-0.7 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी।