सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड को अरबपति बंधुओं नितिन और चेतन संदेसरा द्वारा दायर याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया, जिसमें नियामक द्वारा जांच बंद करने से इनकार करने को चुनौती दी गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने सेबी को 2 अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया। साथ ही यह भी कहा कि उसने नियामक के जांच बंद न करने के फैसले पर उसने सवाल उठाया था।
सुप्रीम कोर्ट के पीठ ने कहा कि उसकी मुख्य चिंता धनराशि की रिकवरी है और वह चाहता है कि पैसा भारत वापस आए क्योंकि इससे बैंकों को फायदा होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संदेसरा बंधुओं द्वारा समझौते के तहत भुगतान किए गए 5,100 करोड़ रुपये को सुरक्षित ऋणदाताओं में आनुपातिक आधार पर वितरित किया जाना चाहिए। इससे पहले अदालत ने पूछा था कि सेबी उनके खिलाफ सभी मामलों को बंद करने के अदालत के आदेश में बाधा क्यों डाल रहा है।
पिछले साल नवंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने स्टर्लिंग बायोटेक के पूर्व निदेशकों नितिन और चेतन संदेसरा के खिलाफ आपराधिक मामलों को इस शर्त पर बंद करने की अनुमति दी थी कि वे 17 दिसंबर तक 5,100 करोड़ रुपये जमा कर दें। यह राशि उनके कुल बकाया का लगभग एक तिहाई है।
पीठ ने निर्देश दिया कि लेनदारों के कंसोर्टियम के बीच बकाया राशि के अनुपात में रकम वितरित की जाए। न्यायालय ने कहा कि यह भुगतान ऋण विवाद का पूर्ण और अंतिम निपटारा होगा, जिससे संबंधित सभी आपराधिक और जांच कार्यवाही समाप्त हो जाएंगी।
अदालत ने कहा, उपरोक्त के परिणामस्वरूप याची के ऋण राशि से संबंधित वह मुकदमा (जिसके लिए एफआईआर दर्ज की गई थी और जिसके लिए एकमुश्त निपटान स्वीकृत और मंजूर किया गया था) आम सहमति के अनुसार पूर्ण और अंतिम निपटान के माध्यम से समाप्त कर दिया जाएगा।
अदालत ने कहा कि यह निर्णय मामले के विशिष्ट तथ्यों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और इसे नजीर के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए। पीठ ने कहा, चूंकि याची बकाया राशि का एक बड़ा हिस्सा चुकाने को तैयार हैं, इसलिए आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का कोई फायदा नहीं होगा।