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पश्चिम बंगाल में जजों को धमकाने और बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्रीय बल तैनात करने का आदेश

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सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपिन पंचोली के पीठ ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बंगाल सरकार की विफलता पर सख्त नाराजगी जताई।

Last Updated- April 03, 2026 | 9:03 AM IST
Supreme Court

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में लगे न्यायिक अधिकारियों को धमकाए जाने पर गंभीर चिंता जताई। न्यायालय ने उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र बल तैनात करने का निर्देश दिया।

शीर्ष न्यायालय का यह सख्त रुख मालदा जिले में हुई एक घटना के बाद आया जिसमें मतदाता सूची से अपना नाम हटाए जाने का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर तीन महिला न्यायाधीशों सहित सात न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया और कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा। इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने कार्यवाही शुरू की।

एक आपातकालीन सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपिन पंचोली के पीठ ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य प्रशासन की विफलता पर सख्त नाराजगी जताई।

पीठ ने कहा कि यह स्थिति प्रशासनिक जिम्मेदारी की लचर स्थिति को दर्शाती है। पीठ ने डरा-धमकाकर न्यायिक कार्यों को कमजोर करने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी। पीठ ने कहा कि यह स्थिति ‘यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने का एक घिनौना प्रयास है बल्कि इस न्यायालय के अधिकार को भी चुनौती देती है। यह कोई सामान्य घटना नहीं थी बल्कि न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और लंबित मामलों में आपत्तियों के निपटारे की चल रही प्रक्रिया को रोकने के लिए सोची-समझी और प्रेरित साजिश प्रतीत होती है’।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, ‘हम किसी को भी हस्तक्षेप करने और न्यायिक अधिकारियों के मन पर मनोवैज्ञानिक हमला करने के लिए कानून को अपने हाथ में लेने की इजाजत हर्गिज नहीं देंगे। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कर्तव्य का उल्लंघन भी है और अधिकारियों को यह कारण बताना होगा कि सूचना मिलने के बावजूद उन्होंने अधिकारियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित क्यों नहीं की।’ न्यायालय का ध्यान इस बात पर खास तौर पर गया कि दोपहर में जब विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ तब अधिकारी प्रखंड (ब्लॉक) विकास अधिकारी के कार्यालय में तैनात थे और कलकत्ता उच्च न्यायालय से बार-बार चेतावनी मिलने के बावजूद प्रभावी हस्तक्षेप में देरी हुई।

जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ राज्य अधिकारी कथित तौर पर घटनास्थल पर अनुपस्थित थे जिसके कारण आधी रात के बाद अधिकारियों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी। पीठ ने अधिकारियों को बाहर निकालते समय हुए पथराव सहित हिंसा के आरोप भी दर्ज किए। न्यायालय ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था की भूमिका पर प्रहार करते हैं। न्यायालय ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों को तैनात करने और जहां आवश्यक हो खतरे के आकलन के आधार पर उनके परिवारों को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया।

शीर्ष न्यायालय ने एसआईआर की कार्यवाही में जनता की मौजूदगी नियंत्रित करने करने और फाइलिंग और सुनवाई के दौरान उपस्थित होने वाले व्यक्तियों की संख्या सीमित करने के भी आदेश दिए। इसके अलावा, न्यायालय ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सहित वरिष्ठ राज्य अधिकारियों से अनुपालन रिपोर्ट मांगी। इसने प्रमुख अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनसे चूक के बारे में स्पष्टीकरण मांगा और उन्हें 6 अप्रैल को न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।

पीठ ने घटना की जांच एक केंद्रीय एजेंसी द्वारा कराने का भी आदेश दिया और ईसीआई को जांच सीबीआई या एनआईए को सौंपने का निर्देश दिया और कहा कि इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट सीधे न्यायालय के समक्ष रखी जाए। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने राज्य में प्रशासनिक परिवर्तनों को लेकर चिंता व्यक्त की।

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने न्यायालय के निर्देशों के साथ सहयोग का आश्वासन दिया जबकि चुनाव आयोग की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता डी एस नायडू ने कहा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया को बाधित करने के लिए अधिकारियों को बंधक बनाया गया था। राज्य की ओर से उपस्थित अधिवक्ता जनरल किशोर दत्ता ने आग्रह किया कि चुनाव आयोग को टकरावपूर्ण रुख नहीं अपनाना चाहिए। मगर न्यायालय ने ऐसी घटनाओं के संस्थागत अधिकार पर व्यापक प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की।

मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा,‘दुर्भाग्यवश आपके राज्य में हर कोई राजनीतिक भाषा बोलता है और यहां ध्रुवीकरण देश में सबसे अधिक है। आप हमें टीका-टिप्पणी करने के लिए विवश कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि हमें पता नहीं है कि उपद्रवी कौन हैं? मैं रात 2 बजे तक सब कुछ निगरानी कर रहा था। बहुत ही अफसोसनाक वाकया है।’

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First Published - April 3, 2026 | 9:03 AM IST

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