JSW Lithium-ion Cell Plant: JSW समूह ने देश में 30 गीगावाट-घंटे (GWh) क्षमता का लिथियम-आयन (Li-ion) सेल प्लांट लगाने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। समूह ने न्यू एनर्जी व्हीकल्स (NEVs) की मैन्युफैक्चरिंग को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा देने की रणनीति के तहत यह फैसला किया है। यह परियोजना एक संयुक्त उद्यम (JV) साझेदार के साथ लगाई जाएगी और इसमें 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया जाएगा। यह सेल प्लांट दो चरणों में बनाया जाएगा।
समूह फिलहाल एक साझेदार की तलाश कर रहा है। एक संभावित विकल्प यह है कि प्लांट को किसी दक्षिण-पूर्व एशियाई देश में स्थापित किया जाए। भारत के थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया सहित कई आसियान (ASEAN) देशों के साथ व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) हैं। बैटरी सेल निर्माण की तकनीक चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों के पास उपलब्ध है।
JSW MG मोटर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रंजन नायक ने बताया कि पहले चरण में 10 GWh क्षमता का प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिसमें लगभग 70 से 75 करोड़ डॉलर का निवेश होगा। दूसरे चरण में 20 GWh अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जाएगी, जिसके लिए लगभग 60 करोड़ डॉलर का निवेश किया जाएगा। इस तरह कुल निवेश 1.3 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा।
नायक ने बताया कि कंपनी अपनी गाड़ियों में लिथियम-आयन फॉस्फेट (LFP) बैटरियों का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। उनके अनुसार, यह तकनीक किफायती है और भारत की गर्म जलवायु के लिए उपयुक्त है।
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हालांकि, इस तकनीक का अधिकांश नियंत्रण चीन के पास है। वहीं दक्षिण कोरिया और जापान लिथियम निकेल मैंगनीज कोबाल्ट (NMC) बैटरियों के प्रमुख उत्पादक हैं। लेकिन चीन सरकार टेक्नॉलजी ट्रांसफर पर कई तरह की पाबंदियां लगा रही है।
JSW चीन से बैटरी सेल आयात करेगी। साथ ही कंपनी भारत में बैटरी असेंबली और अन्य कम्पोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक प्लांट स्थापित कर रही है। कंपनी की योजना दिसंबर 2026 के अंत या जनवरी 2027 के पहले सप्ताह तक अपने पहले न्यू एनर्जी व्हीकल्स बाजार में उतारने की है।
JSW की यह योजना ऐसे समय में सामने आई है जब ओला इलेक्ट्रिक को छोड़कर उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत एडवांस्ड केमिस्ट्री बैटरी सेल निर्माण के लिए पात्र अन्य कंपनियां, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज और एसीसी एनर्जी स्टोरेज शामिल हैं, अभी तक व्यावसायिक स्तर पर उत्पाद लॉन्च नहीं कर पाई हैं।
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टाटा समूह भी अपनी कंपनी एग्राटस (Agratas) के माध्यम से गुजरात के साणंद में 13,000 करोड़ रुपये के निवेश से एडवांस्ड बैटरी सेल प्लांट स्थापित कर रहा है। पहले चरण में इसकी क्षमता 20 GWh होगी। कंपनी ने सेल निर्माण तकनीक के लिए चीनी हितों वाली कंपनी एनविजन एईएससी (Envision AESC) के साथ साझेदारी की है।
मारुति सुजुकी इंडिया (MSIL) के चेयरमैन आर.सी. भार्गव भी कह चुके हैं कि EVs के विस्तार में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक यह है कि देश में कोई भी कंपनी बैटरी सेल का बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग नहीं कर रही है और इस बाजार पर चीनी कंपनियों का दबदबा है।
उन्होंने कहा कि सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की जरूरत होगी, जबकि कच्चे माल की सप्लाई विदेशी कंपनियों के नियंत्रण में है। भार्गव ने यह भी कहा कि मारुति भारत में बैटरियों की असेंबली करेगी, लेकिन सेल का आयात जारी रखेगी।
हालांकि, चीन में बैटरी सेल उत्पादन क्षमता जरूरत से कहीं अधिक हो चुकी है और उसे भविष्य में निर्यात बाजारों की तलाश करनी पड़ेगी। फिलहाल, चीन के पास लगभग 3,000 GWh की स्थापित क्षमता है और वह हर साल 600 से 800 GWh अतिरिक्त क्षमता जोड़ रहा है। दूसरी ओर, चीन में घरेलू मांग लगभग 1,200 GWh है, हालांकि इसमें भी लगातार वृद्धि हो रही है।