भारतीय घरेलू दोपहिया वाहन उद्योग में वित्त वर्ष 2027 (FY27) के दौरान 3 से 5 प्रतिशत की सालाना (Y-o-Y) वृद्धि दर्ज होने की संभावना है। यह अनुमान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA की ताजा रिपोर्ट में जताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग में मांग बनी हुई है, लेकिन उच्च आधार प्रभाव और कमजोर मानसून के अनुमान के कारण तेज ग्रोथ की उम्मीद नहीं की जा रही है।
ICRA ने बताया कि दोपहिया वाहनों की मांग को कुछ अहम फैक्टर सपोर्ट कर रहे हैं। इनमें रेगुलेटरी सुधार, वाहनों के रिप्लेसमेंट की बढ़ती दर और बाजार में स्थिर उपभोक्ता मांग शामिल हैं।
हालांकि, पिछले सालों में हुई तेज बिक्री के कारण इस बार तुलना का आधार ऊंचा है, जिससे ग्रोथ रेट सीमित रह सकता है।
नए वित्त वर्ष की शुरुआत दोपहिया उद्योग के लिए मजबूत रही। अप्रैल 2026 में घरेलू थोक बिक्री (wholesale sales) में 29 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह बढ़कर 1.9 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तेज उछाल का मुख्य कारण हाल ही में लागू हुई GST 2.0 सुधार नीति के बाद वाहनों की कीमतों में आई सापेक्षिक किफायती स्थिति रही।
थोक बिक्री की तुलना में खुदरा मांग (retail demand) की वृद्धि थोड़ी धीमी रही। अप्रैल 2026 में रिटेल बिक्री 13 प्रतिशत सालाना बढ़ी।
इस बढ़ोतरी के पीछे कई कारण रहे, जैसे कि:
इन सभी कारणों ने बाजार में मांग को सपोर्ट दिया।
इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। अप्रैल 2026 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की खुदरा बिक्री में 68 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई।
इस दौरान कुल 1,54,337 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो दर्शाता है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर उपभोक्ताओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है।
देश में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर यानी e2W की मांग लगातार बढ़ रही है। अप्रैल महीने में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी कुल टू-व्हीलर बाजार में बढ़कर 8 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह संकेत है कि अब ग्राहक तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं। रेटिंग एजेंसी ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, बेहतर मॉडल विकल्प और कम ऑपरेटिंग खर्च की वजह से लोगों का भरोसा इलेक्ट्रिक वाहनों पर बढ़ा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियां लगातार नए फीचर्स और बेहतर रेंज वाले मॉडल बाजार में उतार रही हैं। इसके साथ ही पेट्रोल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का कुल खर्च अब काफी हद तक संतुलित होता दिख रहा है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच इन वाहनों की स्वीकार्यता बढ़ रही है।
पूरे वित्त वर्ष 2026 में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर 21.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। अब अप्रैल के आंकड़े यह दिखाते हैं कि यह ग्रोथ आगे भी जारी रह सकती है।
घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात में भी मजबूत तेजी देखने को मिली है। अप्रैल में दोपहिया वाहनों के एक्सपोर्ट में सालाना आधार पर 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे पहले पूरे FY2026 में निर्यात वृद्धि दर 23 प्रतिशत रही थी।
वैश्विक स्तर पर आर्थिक दबाव के बावजूद भारतीय कंपनियां कई विदेशी बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। खासकर किफायती और फ्यूल एफिशिएंट वाहनों की मांग बढ़ने से भारतीय निर्माताओं को फायदा मिल रहा है।
हालांकि रिपोर्ट में आने वाले महीनों को लेकर कुछ बड़ी चिंताओं का भी जिक्र किया गया है। मौसम विभाग की ओर से अल नीनो के असर के चलते कमजोर मानसून की आशंका जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में मांग पर असर पड़ सकता है, क्योंकि ग्रामीण बाजार दोपहिया बिक्री का बड़ा हिस्सा माना जाता है।
इसके अलावा कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी भी कंपनियों के लिए चुनौती बनी हुई है। इससे उत्पादन लागत बढ़ सकती है और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है।
ICRA ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव को भी बड़ा जोखिम बताया है। अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। साथ ही कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में तेजी आने की आशंका भी बढ़ जाएगी। इसका असर वाहन उद्योग की लागत और निर्यात दोनों पर पड़ सकता है।