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कॉकरोच जनता पार्टी बनी युवाओं के राजनीतिक गुस्से का वायरल प्रतीक

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इसके इंस्टाग्राम पेज, एक्स अकाउंट और वेबसाइट पर एक हफ्ते में 2.2 करोड़ से अधिक लोगों ने साइन-अप किया

Last Updated- June 03, 2026 | 11:51 PM IST
Cockroach Janata Party

हाल के दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ऑनलाइन लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल देखी गई। इसके इंस्टाग्राम पेज, एक्स अकाउंट और वेबसाइट पर एक हफ्ते में 2.2 करोड़ से अधिक लोगों ने साइन-अप किया। फिर भारत में इसके सभी सोशल मीडिया हैंडल और वेबसाइट को ‘सुरक्षा कारणों’ से ब्लॉक या बंद कर दिया गया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इन प्रतिबंधों को कानूनी चुनौती दी है। लेकिन कॉकरोच(तिलचट्टों) का सफाया करना आसान नहीं है और इनके मीम लगातार फैलते जा रहे हैं। कार्यकर्ता सड़कों पर कॉकरोच के मुखौटे और टी-शर्ट पहनकर जुलूस निकालते नजर आए। इस प्रचार की गति आश्चर्यजनक नहीं है। ‘कॉकरोच’ शब्द ने युवा, डिजिटल रूप से जागरूक राष्ट्र की नब्ज को छुआ है।

30 वर्ष से कम आयु के भारतीय चौबीसों घंटे स्मार्टफोन से जुड़े रहते हैं और यहां प्रति व्यक्ति डेटा खपत अन्य किसी भी देश से कहीं अधिक है। प्रतिबंध व्यावहारिक रूप से बेकार हैं क्योंकि कई युवा वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का इस्तेमाल नियमित रूप से करते हैं। इनमें से बहुत से लोग डार्क वेब पर समय बिताते हैं, जहां वे क्रिप्टोकरेंसी का व्यापार करते हैं, पोर्न देखते हैं, गेम के लिए चीटकोड का आदान-प्रदान करते हैं, वीडियो पायरेट करते हैं और ऐसे हैक्स साझा करते हैं जिनसे वे मुफ्त में खेल देख सकते हैं। इन सब के कारण वे गुमनाम रहते हुए ऑनलाइन प्रतिबंधों को आसानी से पार करने में माहिर हो जाते हैं।

अधिकांश लोगों को कॉकरोच घिनौने लगते हैं। लेकिन अगर लक्षित समूह द्वारा इसे अपना लिया जाए तो अपमानजनक शब्दों को बेअसर किया जा सकता है। समाजशास्त्रियों ने इस विषय पर बहुत कुछ लिखा है। एलजीबीटीक्यू कार्यकर्ता, अश्वेत कार्यकर्ता और अन्य लक्षित समूहों ने ऐसा अक्सर किया है।

दिपके ने व्यंग्यात्मक रूप से कॉकरोच वाले अपमानजनक शब्द को अपना लिया। लाखों युवाओं ने उनका अनुसरण किया। किसी संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह ‘आलसी और बेरोजगार लोगों की आवाज’ है। इस मीम को जन्म देने वाले मुख्य न्यायाधीश का कहना था कि उनका इशारा फर्जी डिग्रियों वाले लोगों की तरफ था।

यह पता लगाना वास्तव में असंभव है कि युवा भारतीय आलसी हैं या नहीं, क्योंकि उनमें से एक बड़ा हिस्सा बेरोजगार है, और बेरोजगारों को यह साबित करने का अवसर नहीं मिलता कि वे मेहनती हो सकते हैं। कॉकरोच जनता पार्टी की इस लहर का एक मुख्य कारण युवाओं में उच्च बेरोजगारी दर है। 35 वर्ष से कम आयु के भारतीयों का एक बड़ा हिस्सा बेरोजगार है और कुछ तो एक दशक से भी अधिक समय से नौकरी की तलाश में हैं। अन्य लोग जो भी काम मिल पाता है, उसे कर रहे हैं।

अत्यधिक योग्यता प्राप्त लोगों सहित लाखों युवा, किसी भी विज्ञापित नौकरी के लिए हताशा में आवेदन करते हैं। कोई भी सरकार इस मोर्चे पर कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के कार्यबल में प्रवेश करने से स्थिति और भी खराब हो सकती है।

फर्जी डिग्रियों के मामले में, 2026 एक महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। नीट अंडरग्रैजुएट परीक्षा के पेपर लीक होने और सीबीएसई वेबसाइट विवाद को देखते हुए, यह तर्क दिया जा सकता है कि समकालीन भारतीय डिग्रियों और प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता संदिग्ध जरूर है। यह युवाओं के गुस्से का एक और कारण है। सीजेपी की वेबसाइट पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाली एक याचिका थी। वेबसाइट बंद होने से पहले ही इस पर 6 लाख हस्ताक्षर हो चुके थे।

नीट परीक्षा घपला और सीबीएसई की वेबसाइट को आसानी से हैक करके अंक बदलने की बात सामने आने के बाद परीक्षा परिणामों पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। शिक्षा व्यवस्था में हो रही गड़बड़ी का सीधा असर उस आयु वर्ग के सभी लोगों पर पड़ता है। उन लड़कों और लड़कियों को अपनी डिग्रियों की विश्वसनीयता साबित करनी होगी, भले ही उन्हें अच्छे अंक मिले हों। बेरोजगारी और संदिग्ध रूप से संचालित परीक्षाओं का सबसे ज्यादा असर युवाओं पर पड़ता है। लेकिन सीजेपी के ‘कॉकरोच’ ने महंगाई की मार और इससे उनके परिवारों पर पड़ने वाले कष्टों को भी उजागर किया है। जाहिर है, वे बढ़ती महंगाई के लिए सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं।

सीजेपी के ‘घोषणापत्र’ में उन अन्य मुद्दों को भी उठाया गया है जो आज के युवाओं में असंतोष पैदा करते प्रतीत होते हैं। इनमें भाई-भतीजावाद, पूंजीपतियों के सत्ता से गठजोड़ या जोड़तोड़ के आरोप भी शामिल हैं। सीजेपी के संस्थापक ने कई स्वतंत्र वेबसाइटों से बात तो किया, लेकिन टीवी स्टूडियो में आने से इनकार कर दिया है। यह सत्ता प्रतिष्ठान के प्रति अविश्वास का संकेत है, जो ऐसे किसी भी राजनेता के लिए चिंता का विषय होना चाहिए जो युवा जनता से जुड़ने का प्रयास कर रहा है।

सीजेपी और उसका उदय इस बात का संकेत है कि मुख्यसेक्शन के राजनेता अब युवाओं से आसानी से जुड़ नहीं पा रहे हैं। निराश युवा अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए व्यंग्य का सहारा ले रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि रोजगार, महंगाई और शिक्षा जैसी उनकी रोजमर्रा की चिंताओं को दूर करने के लिए वे राजनेताओं पर भरोसा नहीं कर सकते।

क्या टिप्पणीकार सीजेपी की तुलना बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में सरकारों को उखाड़ फेंकने वाले युवा आंदोलनों से करके जल्दबाजी कर रहे हैं? शायद अभी शुरुआती दौर में ऐसा हो। लेकिन ऑनलाइन व्यंग्य पर प्रतिबंध लगाना एक ऐसा कदम है जो अप्रभावी साबित हो सकता है- प्रतिबंध स्ट्राईसैंड प्रभाव पैदा कर सकते हैं, जिससे सामग्री और अधिक फैल सकती है।

सीजेपी का व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण किन विषयों को निशाना बनाता है, और युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता का कारण क्या है, इन सभी का गहन अध्ययन करना आवश्यक है। सीजेपी और उसका घोषणापत्र एक अनौपचारिक जनमत सर्वेक्षण के समान है जो हमें बताता है कि युवाओं को किन बातों की चिंता है, इन चिंताओं का समाधान चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है और करना भी चाहिए।

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First Published - June 3, 2026 | 11:44 PM IST

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