facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

कई मंत्रालय रोक सकेंगे कंटेंट! कानून में संशोधन की तैयारी

Advertisement

इंटरनेट पर आप​त्तिजनक सामग्री को हटाने या ब्लॉक करने की शक्तियों का बढ़ेगा दायरा

Last Updated- March 17, 2026 | 10:46 PM IST
Social Media

वेबसाइटों या प्लेटफॉर्मों को अब अन्य मंत्रालय भी आप​त्तिजनक सामग्री (कंटेंट) को हटाने या ब्लॉक करने का आदेश दे सकते हैं। केंद्र सरकार इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69(ए) में संशोधन पर विचार कर रही है। इसके जरिये सूचना एवं प्रसारण, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय जैसे कुछ प्रमुख मंत्रालयों को आपातकालीन ​स्थितियों में सामग्री ब्लॉक करने और हटाने के आदेश जारी करने का अ​धिकार मिल सकता है। घटनाक्रम से अवगत सूत्रों ने यह जानकारी दी।

फिलहाल, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ही आपातकालीन सामग्री को हटाने और वेबसाइटों या प्लेटफॉर्मों को ब्लॉक करने का आदेश देता है।

एक अधिकारी ने कहा, ‘हम इस पर विचार कर रहे हैं ताकि ऐसी सामग्री पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके जिसे हटाया जाना आवश्यक है। यह अ​धिकार उन मंत्रालयों को मिल सकता है जिनके पास उक्त क्षेत्र के विशेषज्ञ मौजूद हैं और जो उस सामग्री या वेबसाइट की गैर-कानूनी प्रकृति का बेहतर ढंग से निर्धारण कर सकते हैं।’

सामग्री हटाने की शक्तियों का विस्तार अन्य प्रमुख मंत्रालयों तक करने के इस कदम से फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, यूट्यूब और एक्स जैसे सोशल मीडिया और इंटरनेट मध्यस्थों के प्रभावित होने की संभावना है। इन कंपनियों को सामग्री हटाने के पहले से कहीं ज्यादा आदेशों का पालन करना पड़ सकता है।

आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 69(ए) में उल्लेख है कि सामग्री हटाने या वेबसाइटों को ब्लॉक करने के अनुरोध इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के माध्यम से भेजा जाना चाहिए। मंत्रालय अन्य विभागों, नियामकों या कानून प्रवर्तन एजेंसियों से प्राप्त अनुरोध पर ऐसा कदम उठाता है। उसके बाद वह मध्यस्थ या इंटरनेट सेवा प्रदाता को औपचारिक नोटिस जारी करता है।

इस बारे में जानकारी के लिए इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को ईमेल भेज गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘वर्तमान में आईटी अधिनियम की धारा 69(ए) के दायरे का विस्तार करने के प्रस्ताव पर इन प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और अन्य हितधारकों द्वारा चर्चा की जा रही है और संशोधन के सर्वोत्तम तरीके पर जल्द निर्णय हो सकता है।’

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इन प्रमुख मंत्रालयों के अलावा सरकार संशोधित प्रावधान के दायरे को बढ़ाकर कुछ नियामकों को भी इस तरह की शक्तियां दे सकती है। उन्होंने कहा कि मंत्रालयों और नियामकों को सामग्री को आपातकालीन रूप से ब्लॉक करने के अ​धिकार की ‘प्रकृति और आवश्यकता’ के प्रति संवेदनशील रहना होगा।

आईटी अधिनियम की धारा 69(ए) के अलावा अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत सोशल मीडिया और इंटरनेट मध्यस्थों को सामग्री हटाने के नोटिस भी जारी किए जा सकते हैं।

धारा 69(ए) के तहत केंद्र सरकार या उसकी ओर से अधिकृत कोई भी अन्य अधिकारी, यदि मानते हैं कि भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध या लोक व्यवस्था की रक्षा के लिए या उपरोक्त से संबंधित किसी भी अपराध को उकसाने से रोकने के लिए कार्रवाई आवश्यक है तो सामग्री या वेबसाइट को हटाने का आदेश दे सकते हैं।

आईटी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत जारी सामग्री हटाने के नोटिस किसी भी मंत्रालय, नियामक या कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा गृह मंत्रालय के सहयोग पोर्टल के माध्यम से जारी किए जा सकते हैं।

Advertisement
First Published - March 17, 2026 | 10:46 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement